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चंद्रयान-2 को कैबिनेट की मंजूरी

भारत अगले चार सालों में चांद पर न सिर्फ अपना उपग्रह उतारेगा बल्कि उसमें रोबोट भी भेजेगा। हालांकि चांद पर हमारे अंतरिक्ष यात्रियों के कदम 2020 तक ही पड़ेंगे। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में चंद्रयान-2 परियोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इसके लिए कैबिनेट ने 425 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इसमें 2रोड़ की विदेशी मुद्रा भी शामिल है। चंद्रयान-2 में फिलहाल रोबोट सवार होगा, जो चांद से हीलियम-3 के नमूने लेकर वापस लौटेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि बेहद हल्की हीलियम-3 भविष्य में धरती पर ऊर्जा का विकल्प साबित हो सकती है। उधर बेंगलूर में चंद्रयान-1 तैयार है। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में इसे चंद्रमा के गिर्द 100 किमी ऊपर की कक्षा में स्थापित कर दिया जाएगा। लेकिन 2011-12 में प्रक्षेपित किया जाने वाला चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह पर उतरगा। इसमें लैंड रोवर (एक तरह का रोबोट) भेजा जाएगा जो चंद्र सतह की मैपिंग करगा। पूर्व योजना में चंद्रयान-2 में मानव भेजने का विचार था, लेकिन इसरो की तैयारी अभी इसके लिए पूरी नहीं है। माना जा रहा है कि चंद्रमा पर एक बार उपग्रह उतारने के बाद भारतीय वैज्ञानिकों के लिए चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने का रास्ता भी साफ हो जाएगा। चंद्रयान-2 में रूसी स्पेस एजेंसी रोसकोसमोस को भी शामिल किया गया है। मूलत एजेंसी लैंड रोवर तैयार करने में तकनीकी मदद प्रदान करगी। लैंड रोवर दो साल तक चांद की सतह को खंगालेगा।

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  • Web Title: चंद्रयान-2 को कैबिनेट की मंजूरी