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वन अधिकार अधिनियम और कानून पर राज्यस्तरीय कार्यशालावन अधिकार अधिनियम और कानून पर राज्यस्तरीय कार्यशाला

सीएम शिबू सोरन ने कहा है कि राज्य में वृक्षारोपण के नाम पर हवाबाजी ज्यादा हो रही है। वरना राज्य में जितने वृक्षारोपण हो रहे हैं, उसका 20 प्रतिशत काम भी जमीन पर हुआ होता, तो पूर प्रदेश में पेड़ लगाने के लिए जगह नहीं बचती। वृक्षारोपण में कहीं भी फलदार या लाभदायक वृक्ष नहीं लग रहे। यहां करां, नीम, केन जसे वृक्ष लगाने की जरूरत है, जिनका लाभ लोगों को मिल सके। सोरेन ने उक्त बातें 18 सितंबर को ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट में कल्याण विभाग द्वारा आयोजित झारखंड में वन अधिकार कानून और अधिनियम विषयक राज्य स्तरीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि कही।ड्ढr कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए विभाग के प्रधान सचिव यूके संगमा ने कहा कि यह कानून वन क्षेत्र के लोगों को उनका अधिकार देगा। अतिथियों का स्वागत करते हुए आदिवासी कल्याण आयुक्त सुनील वर्णवाल ने कहा कि आजादी के पहले से ही वन क्षेत्र के लोगों के साथ अन्याय हुआ है। इस कानून से वे अपना हक पा सकेंगे। केंद्रीय मंत्री रामेश्वर उरांव और विभागीय मंत्री जोबा मांझी विशिष्ट अतिथि थीं।ड्ढr तकनीकी सत्र में केंद्रीय मंत्रालय के डॉ बचित्तर सिंह, कल्याण विभाग के विशेष सचिव बीसी निगम, एनआइसी रांची के लोकेश कुमार, गुजरात के टीएल पटेल ने अपने विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन जनजातीय कल्याण सचिव आरके रांन ने किया।ड्ढr जंगल से जुड़े मुकदमे वापस लिये जायें: उरांवड्ढr केंद्रीय मंत्री रामेश्वर उरांव में वन अधिकार कानून और अधिनियम विषयक कार्यशाला में सीएम से आग्रह किया कि जिस प्रकार झारखंड राज्य के आंदोलनकारियों पर से मुकदमें वापस लिये गयें हैं, उसी प्रकार जंगल से जुड़े मुकदमें भी वापस लिये जायें।ड्ढr एक्ट जानना जरूरी: पटेलड्ढr गुजरात के ट्राइबल डेवलपमेंट विभाग से आये टीएल पटेल ने कहा कि सबसे पहले संबंधित अधिकारी और अन्य लोगों को यह कानून पूरी तरह जानने की जरूरत है। इसके बाद ही वे वन में रहनेवाले लोगों को सही ढंग से इसे समझा पायेंगे। जरूरी है कि पंचायत, प्रधान, ब्लॉक के अफसरों को भी इससे अवगत कराया जाये।ड्ढr बहुत महत्वपूर्ण है वन अधिकार कानून: डॉ सिंहड्ढr केंद्रीय जनजातीय मामलों के ज्वाइंट सेक्रेटरी डॉ बचित्तर सिंह ने कार्यशाला के तकनीकी सत्र में वन अधिकार कानून के महत्वपूण पहलुओं और इसे कैसे लागू किया जाये पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह कानून इतना प्रभावी है कि इसके जमीन पर उतरते ही जंगल में रहनेवाले लोगों का जीवन बदल जायेगा। चिकित्सकों की नियुक्ित रद्द करने के लिए याचिकाड्ढr

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