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पापिया घोष हत्याकांड में शंकर साव को फांसी

बहुचर्चित ‘पापिया घोष हत्याकांड’ में घटना के 22 महीने बाद गुरुवार को पटना की फास्ट्र ट्रैक कोर्ट ने दोषियों की सजा मुकर्रर कर दी है। मामले के मुख्य आरोपी शंकर साव को फांसी की सजा तथा अन्य तीन को उम्र कैद की सजा दी गई है। इसके अलावा एक को दो साल की सजा दी गई है। गौरतलब है कि डकैती के दौरान पटना विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की प्रोफेसर पापिया घोष और उनकी नौकरानी मालती देवी की चाकुओं से गोंद कर की गई निर्मम हत्या के मामले में कोर्ट (संख्या-5) के न्यायाधीश ओमप्रकाश ने शंकर साव, मनोहर कुमार आशीष कुमार और अनिल उरांव को भारतीय दंड संहिता की धारा 3े तहत डकैती के दौरान हत्या करने और धारा 412 के तहत डकैती का सामान बरामद होने का दोषी करार दिया था। पांचवे आरोपित स्थानीय वकील रामचन्द्र महतों को धारा 414 के तहत चोरी का सामान रखने-छिपाने का दोषी करार दिया गया। राजधानी के पाटलिपुत्रा कालोनी में पापिया घोष के निजी मकान (नंबर-168) में 2-3 दिसम्बर 2006 की रात अपराधियों ने खूनी तांडव मचाया था। मामले का स्पीडी ट्रायल हुआ जिसमें दोनों पक्षों की ओर से 35 गवाहों को कोर्ट में पेश किया गया। दो आरोपितों संयोग राय और मो. मुस्तकीम को फरार दिखाते हुए पांच आरोपितों के खिलाफ पाटलिपुत्र थाने के अनुसंधानकर्ता एसआई कुमार अभिनव ने अदालत में आरोप पत्र दायर किया था।

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  • Web Title: पापिया घोष हत्याकांड में शंकर साव को फांसी