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पारदर्शी होगी डोप टेस्ट प्रक्रिया

ेन्द्र सरकार ने मोनिका देवी मामले में टी.एस. कृष्णमूर्ति आयोग की रिपोर्ट को मंजूर करते हुए प्रतिबंधित दवा सेवन परीक्षण (डोप टेस्टिंग) की प्रक्रिया के बारे में सख्त दिशा निर्देश जारी किए। कृष्णमूर्ति आयोग का गठन भारोत्तोलक मोनिका के डोप टेस्ट की स्थितियों और इससे संबंधित मुद्दों की जांच के लिए किया गया था। 6किलो वर्ग की मोनिका को डोप टेस्ट में दोषी पाए जाने के बाद बीजिंग ओलंपिक खेलों के लिए भारतीय टीम से हटा दिया गया था। बाद में उन्हें निर्दोष घोषित कर दिया गया मगर तब तक देरी हो जाने के कारण वह ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले सकीं। कृष्णपूर्ति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि डोप टेस्ट की प्रक्रिया के बेहतर प्रबंधन से इस तरह की स्थिति को टाला जा सकता है। खेल मंत्रालय ने दिशा निर्देशों में डोप टेस्ट की प्रक्रिया को प्रभावशाली, विश्वसनीय, निष्पक्ष और पारदर्शी रखने पर जोर दिया है। मंत्रालय के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय परिपाटी के अनुरूप खिलाड़ियों का समय-समय पर प्रतियोगिताओं में और उनसे बाहर भी डोप टेस्ट किया जाना चाहिए। लेकिन उन्हें पूरा सम्मान देते हुए इस प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखना भी जरूरी है। दिशानिर्देशों में कहा गया है कि किसी एथलीट के करियर को प्रभावित करने वाला कोई निर्णय लेने से पहले उसे अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि एथलीट अपने समूचे करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रयास करता रहता है। ऐसे में मनमानी प्रक्रिया और दोषपूर्ण नतीजों के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई से उसे मानसिक पीड़ा पहुंचना स्वाभाविक है। उसने कहा कि जिन एथलीटों के खिलाफ डोपिंग के आरोप साबित हो चुके हैं उनके साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। लेकिन डोप टेस्ट के लिए स्थापित प्रक्रिया और दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए। दिशा निर्देशों में डोप टेस्ट के लिए किसी एथलीट का नमूना लेने में पारदर्शिता और सावधानी बरतने और उसे पूरी प्रक्रिया से अवगत रखने की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि नमूने का विश्लेषण होने के 24 घंटों के भीतर प्रयोगशाला की रिपोर्ट भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) को भेज दी जानी चाहिए। साई 48 घंटों के अंदर संबंधित खेल महासंघ को रिपोर्ट की जानकारी देने के अलावा यह भी बताएगा कि क्या इस बारे में आगे कोई कार्रवाई की जानी है। डोप टेस्ट की जांच में एथलीट को दोषी पाए जाने पर महासंघ उसे तुरंत इसकी जानकारी देगा। एथलीट को बी नमूने की जांच की मांग करने का पूरा अधिकार है। इस नमूने को खोले जाने और इसके विश्लेषण के दौरान एथलीट या उसका प्रतिनिधि मौजूद रह सकता है। दोषी एथलीट के फौरी निलंबन के 10 दिनों के अंदर उसे अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए।

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