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आत्मा की पवित्रता है शिक्षा का मूल

आत्मा की पवित्रता है शिक्षा का मूल आज के इस तकनीकी, मशीनी एवं वैज्ञानिक युग में इंसान को अपने अंदर बसी आत्मा एवं परमात्मा को देखने की न तो फुर्सत है और न ही आवश्यकता।ड्ढr शारीरिक सुख-दु:ख प्रधान हो गया है। भोग-विलास के लिए सार संसाधन एवं समय जुटाए जा रहे हैं। आत्मा की स्वच्छता, पवित्रता एवं सुंदरता की ओर किसी का ध्यान ही नहीं है। किसी भी विद्यालय की आत्मा अनुशासन एवं नैतिकता होती है। यह समाज के साथ-साथ शिक्षण संस्थानों से भी मृतप्राय हो गया है। अगर मशीनी युग न होता तो आत्मा की अनुपस्थिति में शिक्षण संस्थानों का अंत हो गया होता। मगर संस्थान अब भी जिन्दा हैं, रोबोट की तरह। शायद हमार समाज को रोबोट इंसान से अधिक उपयोगी लग रहे हैं।ड्ढr शायद युवा पीढ़ी ‘एक स्थान पर रहने से अच्छा है कि गलत रास्ते पर चला जाए’ के सिद्धांत में विश्वास करती है। हमार गुरु, पूर्वज, ऋषि-महर्षि एवं मनीषियों ने कितनी तपस्या करके इन मानवीय गुणों को विकसित किया था। जो विद्यार्थी इन गुणों से अलंकृत होता है, आधुनिकता की सोच उसे बैकवर्ड, दब्बू, डरपोक और गंवार की श्रेणी में रखता है। यदि एक ईमानदार कोशिश हर शिक्षण संस्थानों के माध्यम से की जाये, तो यह दुर्लभ धरोहर, जिनके बिना इंसान को इंसान नहीं कहा जा सकता, बच जायेगी। एक संकल्प लेने की जरूरत है, जिससे आदमी को पशु बनने से रोका जा सके।शहर को शिक्षण संस्कार दिया, बदले में प्यार मिलाभूखे को खाना खिला दिया जाये, तो कुछ घंटों के बाद उसे फिर भूख लग जाती है। इंसान को जितनी चीजों की आवश्यकता होती है, उसकी आयु सीमित होती है। मगर ज्ञान एवं शिक्षा जीवनपर्यन्त इंसान के साथ रहते हैं। इसी विचारधारा के साथ 17 जुलाई, 1ो टेंडर हार्ट विद्यालय की स्थापना हिनू में एक छोटे से परिसर में पांच बच्चों के साथ की गयी। समाज को दस हाार सभ्य नागरिक देने का संकल्प ने हमें अब तक इस विद्यालय से बांध कर रखा है।ड्ढr 1तक हीनू परिसर में यह विद्यालय चलता रहा। 1में विद्यालय का स्वरूप इतना बड़ा हो गया कि हिनू परिसर छोटा पड़ गया। उसी वर्ष इसका स्थानांतरण बिरसा चौक किया गया। वहां कला-संस्कृति, योग, कराटे, कम्प्यूटर इत्यादि शामिल किये गए और विद्यालय ने अपनी पहचान बना ली। 2002 में तुपुदाना में एक विशाल परिसर में टेंडर हार्ट सीनियर सेकेंडरी विद्यालय की स्थापना की गयी। सीबीएसइ की दसवीं की परीक्षा में दो वर्ष यहां के विद्यार्थियों ने प्रतिशत अंक लाकर झारखंड एवं रांची में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त किया।ड्ढr 2007 में सीनियर सेकेंडरी स्कूल के पास ही टेंडर हार्ट नर्सरी विद्यालय के नवनिर्मित विशाल भवन का उद्घाटन किया गया। यह सुंदर होने के साथ-साथ आधुनिकता का भी पर्याय है।

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