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हर नचार खोचा रही कुछ नया

भारी वर्षा से पहले दिन शुरू न हो सका राष्ट्रीय पुस्तक मेला शनिवार को आरम्भ तो हो गया लेकिन अपने रंग में न आ सका। यादातर स्टॉलों पर शाम तक किताबों को लगाने का काम ही चलता रहा। आयोकों का मानना है कि रविवार को स्टॉल लगा लिएोाएँगे और अवकाश होने से अधिक लोग भी आ सकेंगे। बलरामपुर मैदान में आयोित यह मेला 28 सितम्बर तक प्रतिदिन पूर्वाह्न 11 बो से रात्रि 10 बो तक चलेगा। स्टॉलों पर लोग नई किताबों खोते नार आए।ड्ढr मेले के उद्घाटन पर द फेडरशन ऑफ पब्लिशर्स एण्ड बुकसेलर्स एसोसिएशन्स इन इण्डिया के अध्यक्ष एस.सी.सेठी ने कहा किोिस प्रकार सरकार ने उदारीकरण के तहत विदेशी इलेक्ट्रानिक सामान को भारतीय बार में उतारा है, विदेशी कागा को भी यह सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुस्तकों के अधिक मूल्य होने का बड़ा कारण कागाों का अधिक मूल्य होना है। श्री सेठी ने कहा कि यह विडम्बना है कि फ्रिा तो सस्ते हो रहे हैं लेकिन किताबें महँगी हो रही हैं। उन्होंने कहा कि अपने देश में 24 भाषाओं में पुस्तकें छपती हैं। प्रतिवर्ष 70 हाार पुस्तकें प्रकाशित होती हैंोिनमें 20 हाार अंग्रेाी में और शेष अन्य भाषाओं में हैं।ड्ढr इस अवसर पर सिटी माण्टेसरी स्कूल के संस्थापकोगदीश गांधी ने कहा कि पुस्तकों से अच्छा मित्र और कोई नहीं हो सकता। एसबीआई के मुख्य महाप्रबन्धक शिवकुमार, कवि सव्रेश अस्थाना, मेले के संयोक देवराा अरोड़ा, सह संयोक मनो सिंह चन्देल, उमेश ढल, सीएमएस के मुख्योनसम्पर्क अधिकारी हरिओम शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। मेला में सायंकाल आयोित ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम में कवि एवं आयकर अधिकारी गिरीश पाण्डेय तथा कथाकार-उपन्यासकार महेन्द्र भीष्म ने कहा हम अपने पात्रों का चयन आसपास के समाा से ही करते हैं। रात्रि में आयोितोूनियर किशोर कुमार के गीतों का कार्यक्रम वर्षा के कारण स्थगित कर दिया गया। 21 सितम्बर को सायं 5.30 बो से ‘लेखक से मिलिए’ में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी राकेश कुमार मित्तल भाग लेंगे।

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