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अब वह चमक कहां, बस पहचान बच जाये : अन्नपूर्णा

माइका के धंधे पर आये संकट को लेकर कोडरमा की विधायक अन्नपूर्णा देवी चिंता में हैं। उनका कहना है कि अब कोडरमा में अबरख की वह चमक कहां। बचा- खुचा भी नहीं रहा, तो सिर्फ याद रह जायेगी। विधायक के मुताबिक रद्दी (वेस्टा) चुनने पर रोक लगाने तथा प्रोसेसिंग प्लांट में पड़ने वाले छापे (ाब- तब:) का प्रतिकूल असर पड़ा है। पिछले दिनों बड़ा गतिरोध हो गय था जिसे स्थानीय प्रशासन से बात कर दूर तो किया गया, लेकिन कोडरमा के लोग इसका स्थायी समाधान चाहते हैं। इन्हीं बातों को लेकर सीएम शिबू सोरन से मिले थे। विधायक के मुताबिक कारोबारी चाहते हैं कि सरकार कोई नियमावली बनाये या रायल्टी लगाये, लेकिन वेस्टेा चुनने से लेकर खरीद- विक्री और प्रोसेसिंग के बाद उसे बाहर भेजने पर रोक नहीं लगे। कोलकाता में व्यापारी तो साढ़े तीन प्रतिशत सेस देते ही हैं यहां भी सरकार कोई हल निकाले। उन्होंने कहा कि वेस्टेा चुनने में हाारों गरीब लगे होते हैं। माइका खदानें तो पहले ही बंद हो गयी।ड्ढr ढाब, गझंडी, मेघाजरी आदि इलाकों में ग्रामीणों के जीने का यह जरिया है। फिर बीच में वेस्टेा खरीदने वाले लोग हैं। वे इसे प्रोसेसिंग प्लांट वालों को देते हैं। फिर पैकेा से लेकर ट्रांसपोटिर्ंग का काम। अब यह कारोबार एकदम बंद हो जाये, तो आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होगी। प्रशासन कहां पर रोक लगाता है और आपकी क्या बातें हुई हैं, पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि लगता है कि प्रशासन वेस्टेज चुनने को अवैध मानता है। खरीद- विक्री पर भी रोक लगायी जाती है। जब वेस्टेा नहीं चुने जायेंगे खरीद- विक्री नहीं होगी, तो प्लांट कैसे चलेगा। हम चाहते हैं सरकार कोई रास्ता निकाले। अबरख के कारोबार को बचाये। यह छोटा मामला दिखता है, पर है अस्तित्व का सवाल।

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