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क्षतिग्रस्त सड़कों का मामला: निर्माण पर प्रति किमी डेढ़ करोड़ खर्च होंगे

बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण पर प्रति किमी. डेढ़ करोड़ रुपए खर्च होंगे। नेशनल हाइवे के पुनर्निर्माण पर प्रति किमी. 1.55 करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी है जबकि स्टेट हाइवे एवं जिलों की मुख्य सड़कों (एमडीआर) पर प्रति किमी. 1.05 करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य है। कोसी तटबंध के टूटने से कोसी एवं पूर्णिया प्रमंडल के पांच जिलों की सड़कें ध्वस्त हो गईं हैं। साथ ही आधा दर्जन अन्य जिलों की अधिकांश सड़कें भी बाढ़ से टूट गईं हैं।ड्ढr ड्ढr पथ निर्माण विभाग ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों की अंतरिम रिपोर्ट तैयार कर ली है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक क्षतिग्रस्त छह जिलों में नेशनल हाइवे के पुनर्निर्माण पर कुल 486.71 करोड़ रुपए खर्च होने हैं जबकि सात जिलों के स्टेट हाइवे एवं एमडीआर पर 1682 करोड़ रुपए खर्च होंगे तभी आवागमन सामान्य हो पायेगा। इन जिलों की 314 किमी. नेशनल हाइवे और 1600 किमी. स्टेट हाइवे व एमडीआर टूटी हैं। कई जगह पर तो सड़क का नामोनिशान ही नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि इन सड़कों की अस्थायी मरम्मत पर 510 करोड़ तुरंत खर्च करने की जरुरत है। बाढ़ का पानी उतरते ही सड़कों को मोटरबुल बनाने की चुनौती है। वहीं सड़कों के स्थायी निर्माण पर कुल 1658 करोड़ रुपए खर्च होंगे। विभागीय आकलन के मुताबिक मधेपुरा जिला के टूटे एनएच पर 158 करोड़ रुपए, पूर्णिया में रोड़, सहरसा में रोड़, सुपौल में 83 करोड़, खगड़िया मेंड्ढr 46 करोड़ और भागलपुर के एनएच पर 10 करोड़ रुपए खर्च करना तय हुआ है।ड्ढr वहीं सुपौल जिला के स्टेट हाइवे एवं एमडीआर पर 68रोड़ रुपए, अररिया में 3रोड़, सहरसा में 26रोड़, मधेपुरा में 204 करोड़, खगड़िया में 68 करोड़, पूर्णिया में 34 करोड़ और कटिहार में 16 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे।

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