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थानों में दर्ज नहीं होते कमजोरों के मुकदमे

झारखंड हाइकोर्ट की चीफ जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्र ने कहा कि अन्याय सहना भी बहुत बड़ा अन्याय है। इतने सार कानून के बावजूद गरीबों का शोषण हो रहा है। कानून एक हथियार है, गरीब इसका इस्तेमाल अपने हक में करं। डायन प्रथा आज भी कायम है। दुखद है कि इस तरह की घटनाओं में कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ता है। इस तरह की घटनाएं मीडिया के माध्यम से सामने आती हैं। चीफ जस्टिस तुपुदाना के बालसिरिंग में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में बोल रही थीं। इसका आयोजन झारखंड उच्य न्यायालय विधिक सेवा समिति और स्वयंसेवी संस्था स्नेह ने किया। चीफ जस्टिस ने सीनियर एसपी एमएस भाटिया और डीसी राजीव अरुण एक्का से कहा कि वे ऐसी व्यवस्था बनायें, जिससे लोगों को फर्स्ट एड जस्टिस तुरंत मिले। पुलिस स्टेशन में गरीबों के मुकदमे दर्ज नहीं होते और होते भी हैं, तो कार्रवाई नहीं होती। एसी बात सामने आने पर दोषी पुलिस अफसर के सर्विस रिकॉर्ड में इसे लिखा जाना चाहिए। जस्टिस एमवाइ इकबाल ने कहा कि एक हाार 83 गांवों में कानून की जानकारी के लिए लॉ लाइब्रेरी खुले हैं। जहां नौ भाषाओं में मौलिक अधिकारों की जानकारी के लिए अनुवादित कानूनी पुस्तकें हैं। जस्टिस अमरश्वर सहाय ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकार अधिनियम 1े प्रावधान झारखंड में लागू किये जा चुके हैं। राज्य के 1जिलों में स्थायी लोक अदालतें हैं। समारोह को डॉ रश्मि, वरिष्ठ अधिवक्ता एमके कश्यप ने संबोधित किया। मौके पर उपविकास आयुक्त एस किड़ो, झारखंड बार कौंसिल के अधिवक्ता समेत पुलिस के आला अधिकारी मौजूद थे। धन्यवाद ज्ञापन अधिवक्ता वंदना सिंह ने किया।

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