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धन की कमी नहीं पर मरम्मत राज्य कराए : जयप्रकाश

ेन्द्र ने स्पष्ट कर दिया है कि कुसहा तटबंध के लिए धन की कमी नहीं होने दी जायेगी लेकिन मरम्मत तो राज्य सरकार को ही करानी पड़ेगी। सोमवार को केन्द्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री जयप्रकाश यादव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर भी तटबंध की मरम्मत कराने के बजाय नीतीश सरकार भारत-नेपाल के संबंध खराब करने की कोशिश कर रही है। बिहार में राजनैतिक नेतृत्व का अभाव है। मुख्यमंत्री को बदलना ही पड़ेगा। हालांकि ‘राज्य सरकार पर तटबंध मरम्मत और जनता पर सजा देने’ की जिम्मेदारी डालते समय श्री यादव इस सवाल को टाल गये कि क्या 30 लाख लोगों के प्रति राज्य सरकार को उसकी जवाबदेही का अहसास कराने के लिए केन्द्र संविधान की धारा 355 के तहत चेतावनी देगा?ड्ढr ड्ढr उन्होंने कहा कि कुसहा संकट पर केन्द्र को नाहक बदनाम किया जा रहा है। दुष्प्रचार हो रहा है कि भारत-नेपाल के बीच जल संसाधन मंत्रालय की संयुक्त समिति की 2004 से बैठक न होने के कारण बांध टूट गया। सच यह है कि समिति दोनों देशों के बीच समझौते-संधियों के मुद्दे और पॉलिसी बनाने के लिए बनी थी न कि कोसी बराज के कार्यो के मूल्यांकन के लिए। बिहार सरकार ने कोसी उच्चस्तरीय समिति के अनुशंसित कार्यो को पूरा करने में घोर लापरवाही बरती। राज्य ने 15 जून तक काम समाप्त कर लेने की सूचना दी जबकि उस समय 26 लाख में से मात्र 13 लाख रुपये खर्च हुए थे। श्री यादव ने साफ तौर पर कहा कि जल संसाधन राज्य का मामला है और हम संघीय ढांचे में बंधे हैं। इसलिए धारा 355 की ओर नहीं जाना चाहते। बांध नीतीश सरकार की नाकामी की वजह से टूटा है। इन्हें जनता ही सही समय पर सजा सुनायेगी।ड्ढr ड्ढr कोसी पर केन्द्र ने कोताही बरतीड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने आरोप लगाया है कि केन्द्र के स्तर पर कोसी को लेकर भारी कोताही बरती गई और उसी का परिणाम तटबंध टूटने के रूप में सामने आया है। 17 जुलाई को केन्द्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री जयप्रकाश नारायण यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में कोसी समस्या पर चर्चा हुई। बैठक में बिहार के जल संसाधन मंत्री विजेन्द्र यादव के अलावा जीएफसीसी के सदस्य ने सूचित किया था कि नदी की धारा मुड़ रही है और उससे समस्या उत्पन्न हो रही है।ड्ढr केन्द्र ने नवम्बर में तकनीकी टीम भेजने का निर्णय लिया। अपने दावे के समर्थन में उन्होंने उस बैठक की कापी भी पेश की और कहा कि अगर यह टीम पहले भेजी जाती तो कोसी प्रलय को टाला जा सकता था। उन्होंने कहा कि कोसी की समस्या को सामान्य ढंग से लेने वाले केन्द्रीय मंत्री अब गोएबुल्स की तरह चीख रहे हैं। उन्हें इस बात का जवाब देना होगा कि उन्होंने इतनी बड़ी समस्या को गंभीरता से क्यों नहीं लिया। अब राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की चुप्पी पर गहरी नाराजगी जाहिर की और कहा कि वे इतने रीढ़विहीन हो गए हैं कि अपने मंत्रियों पर अंकुश भी नहीं लगा सकते।ड्ढr श्री सिंह ने केन्द्रीय मंत्री के उस आरोप को भी खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा कि केन्द्र द्वारा दी गई राशि को बिहार ने खर्च नहीं किया। पूर्वी तटबंध प्रमंडल वीरपुर का दस्तावेज पेश करते हुए उन्होंने कहा कि वहां केन्द्र ने मात्र 85 लाख रुपए के कार्यो की अनुशंसा की थी जिसमें 27 जून तक 83.लाख रुपए खर्च हुए। जिस जगह पर तटबंध टूटा वहां केन्द्र ने मात्र 1.1लाख रुपए का काम ही स्वीकृत किया जिसे 100 प्रतिशत पूरा किया गया। अपनी गलती छुपाने के लिए केन्द्रीय मंत्री बार-बार झूठ का सहारा ले रहे हैं।ं

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  • Web Title: धन की कमी नहीं पर मरम्मत राज्य कराए : जयप्रकाश