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छोटे निर्यातक उठा सकते हैं करंसी फ्यूचर से लाभ

अगर आप छोटे निर्यातकों की श्रेणी में हैं और मुद्रा के लगातार उतार-चढ़ाव के चलते घाटा उठा रहे हैं तो लगातार प्रतिस्पर्धी हो रहे बाजार में अपने जोखिम को कम करने और लाभप्रदता को बढ़ाने का इंतजाम आसानी से कर सकते हैं। करंसी फ्यूचर से आप अपनी निर्यात आय के लिए जोखिम प्रबंधन कर सकते हैं। इसके लिए बैंकों की ओर से करंसी डेरवेटिव जसी स्कीमों के जरिए उपलब्ध डॉलर राशि के लिए भविष्य का वायदा कवर लेना होगा। इससे डॉलर में उतार-चढ़ाव के चलते मुद्रा जोखिम से बचाव संभव हो सकता है। उदाहरण के तौर पर आपको शिपमेंट के 0 दिन बाद 10 करोड़ डॉलर की निर्यात आय होनी है तो उसे आप करंसी फ्यूचर में डॉलर के बढ़े हुये रट पर वायदा कवर कर सकते हैं। इससे पहले तक इसमें निश्चित परिवक्वता अवधि के बाद ही पूरा सेटलमेंट होता था लेकिन हाल ही में आरबीआई की ओर से करंसी फ्यूचर की सुविधा शुरू करने से इसका सेटलमेंट रोाना के आधार पर होता है। मजे की बात यह है कि 0 दिन बाद मिलने वाली निर्यात आय के पहले ही रोाना आधार पर डॉलर के सापेक्ष रुपये में आने वाला उतार चढ़ाव आपके सेटलमेंट में दिखाई पड़ेगा। इससे हासिल होने वाला लाभ आपके खाते में होगा। आपका कैश फ्लो स्वाभाविक रूप से बढ़ जाएगा। लेकिन इस बात ध्यान रखना होगा कि अगर आपकी हेािंग गलत हुई तो फायदा बैंक को होगा। यानी अगर एक डॉलर का मूल्य 46 रुपये है और आपने इसे 42 रुपये पर हेा किया तो उतार-चढ़ाव के परिणाम स्वरूप इसके 41 रुपये पर आने से आपको फायदा होगा लेकिन 43 रुपये पर जाने से अंततोगत्वा बैंक को।

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