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राहुल के बयान पर बवाल

बात चूंकि राहुल गांधी के हवाले से और वह भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अमेरिका यात्रा पर जाने के बाद पंजाब से आई है, कांग्रेस और यूपीए में एक तरह का बवाल सा मच गया। मीडिया रिपोटोर्ं में श्री गांधी के हवाले से कहा गया कि उनके प्रधान मंत्री बनने का विकल्प खुला है, बंद नहीं हुआ है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पंजाब यात्रा पर गए कांग्रेस के महासचिव श्री गांधी ने पंजाब विश्व विद्यालय पटियाला में एक कार्यक्रम के दौरान किसी छात्र के द्वारा प्रधानमंत्री पद पर उनकी तरक्की के बार में पूछे गए सवाल के जवाब में यह बात कही थी। श्री गांधी के इस तथाकथित वक्तव्य के सार्वजनिक होते ही कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष एवं कार्य समिति के सदस्य वीरप्पा मोइली ने आानन फानन में इसका खंडन जारी करते हुए कहा कि श्री गांधी ने ऐसा कुछ नहीं कहा है। श्री मोइली के अनुसार करीब डेढ़ हजार छात्रों को संबोधित करते हुए श्री गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका ध्यान पद पर नहीं है। इस समय वह सिर्फ युवक कांग्रेस तथा पार्टी के छात्र संगठन को मजबूत बनाने पर ध्यान दे रहे हैं। श्री मोइली के अनुसार सच तो यह है कि जब श्री गांधी छात्रों को संबोधित कर रहे थे, वहां कोई मीडियाकर्मी या टेलीविजन चैनल के लोग मौजूद नहीं थे। इससे पहले 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर जब प्रधानमंत्री मनमोहन से पूछा गया कि क्या वह अगले साल भी लाल किले पर झंडा फहराएंगे तो जवाब में श्री सिंह ने कहा था, उम्मीद तो है। बगल में खड़ी कांग्रेस और यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी तपाक से कहा था, ‘‘क्यों नहीं? यकीनन।’’ यूपीए के एनसीपी जसे कुछ घटक लोकसभा चुनाव से पहले राजग की तरह ही यूपीए के प्रधानमंत्री पद के दावेदार को भी घोषित कर चुनाव लड़ने की बातें करते रहे हैं। परमाणु करार की सफलता के मद़देनजर उनका दबाव मनमोहन सिंह को ही भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश कर चुनाव में जाने के लिए रहा है। कांग्रेस अधिकृत तौर पर यही कहती रही है कि प्रधानमंत्री का पद अभी खाली नहीं है। जबकि कांग्रेस का एक बड़ा तबका और यूपीए के भी कई घटकों की राय में प्रधानमंत्री के रूप में युवा नेतृत्व को पेश किया जाना चाहिए।

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