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असलहा जमा कराने में भी ‘खेल’

माल के अकबरपुर गाँव में जिस समय होमगार्ड ब्रजबिहारी व उसके दोस्त ग्रामीणों को डराने के लिए फायरिंग कर रहे थे, उस समय कई ग्रामीणों के मन में यह बात चुभ रही थी कि काश असलहे जमा न हुए होते तो जवाब देते। घटना के बाद जब अफसर पहुँचे तो कई ग्रामीणों ने अपनी यह व्यथा उन्हें सुनाई भी। दरअसल चुनाव के मद्देनजर असलहे जमा कराने में भी पुलिस ‘खेल’ करती है। इसी खेल से ब्रज बिहारी को बल मिला और ग्रामीण असहाय बने रहे। ऐसा सिर्फ माल थाना क्षेत्र में ही नहीं बल्कि पूरे शहर में हो रहा है।ड्ढr चुनाव की आचार संहिता लागू होते ही पुलिस व प्रशासन लाइसेंसी असलहा जमा कराने की प्रक्रिया शुरू करा देता है। हर थानेदार को फरमान जारी होता है कि हर हाल में लाइसेंसी असलहे जमा करवा दिए जाएँ। हालाँकि कोर्ट और निर्वाचन आयोग का आदेश है कि उसी व्यक्ित के असलहे जमा कराए जाएँ, जिनसे कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है। पर, होता इसका उल्टा है। अलीगंज के बीपी सिंह के घर तीन बार पुलिस वाले आकर यह कह चुके हैं कि लाइसेंसी बन्दूक थाने पर अथवा दुकान पर जमा करवा दो। वरना, आपके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। श्री सिंह इस बात को लेकर हैरान हैं कि उनके खिलाफ तो एक भी मुकदमा नहीं है, फिर उन पर इतना दबाव क्यों? जबकि उनके ही पड़ोस में रहने वाले दो बाहुबलियों के पास दो-दो लाइसेंसी असलहे हैं। जेल भी जा चुके हैं पर उनके घर पुलिस एक बार भी नहीं गई। यही माल के अकबरपुर गाँव में भी किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि ब्रजबिहारी कई बार बवाल कर चुका है पर चुनाव में उसके खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की गई। उसका असलहा जमा न करने के पीछे पुलिस तर्क दे रही है कि उसने प्रशासन से असलहा जमा न करने की अनुमति ले रखी थी। हारतगंज पुलिस का कहना है कि उनके यहाँ ज्यादातर लाइसेंस धारक अफसर या राजनेता हैं। ऐसे में उनके असलहे जमा कराना टेढ़ी खीर होती है। एक पुलिस अधिकारी का ही कहना है कि थानेदार सिर्फ औपचारिकता के तौर पर ही असलहा जमा कराने की कार्रवाई करते हैं। कोई 30 प्रतिशत तो कोई 40 प्रतिशत तक ही असलहे जमा कराकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं। इसमें ही खेल किया जाता है। जो जरा सा भी पहुँच वाले होते हैं, उनसे पुलिस कुछ कहती ही नहीं है। फिर कोटा पूरा करने के लिए वह कमजोर लोगों को भी डपट कर असलहा जमा करने के लिए बाध्य कर देती है।ड्ढr सिर्फ संदिग्धों केड्ढr असलहे जमा होते हैंड्ढr एसएसपी लॉ एण्ड आर्डर रघुबीर लाल का कहना है कि चुनाव के दौरान जो लोग शांति व्यवस्था के लिए खतरा बन सकते हैं,सिर्फ उनके लाइसेंसी असलहे जमा कराए जा रहे हैं। इससे अलग अगर किसी पर पुलिस वाले असलहा जमा कराने के लिए दबाव बना रहे हैं तो वे उनसे मोबाइल नम्बर 0387पर सम्पर्क कर सकते हैं। अगर इनमें से भी कोई पुलिस की नजर में संदिग्ध है पर वह पुलिस को गलत बता रहा है तो वे जिलाधिकारी को एक प्रार्थना पत्र देकर अनुमति ले सकते हैं।

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