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नलिनी की समय पूर्व रिहाई खारिज

मद्रास उच्च न्यायालय ने राजीव गांधी हत्याकांड मामले में नलिनी और दो अन्य दोषियों की समय पूर्व रिहाई संबंधी याचिका बुधवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति एस. नागमुत्थु ने नलिनी, राबर्ट पायस और जयकुमार द्वारा दायर याचिकाआें को खारिज करते हुए तमिलनाडु सरकार को फिर से एक सलाहकार बोर्ड के गठन करने का निर्देश देते हुए कहा कि दोषियों को नए बोर्ड के समक्ष फिर से याचिका दायर करनी होगी। उन्होंने कहा कि अदालत दोषियों की समय पूर्व रिहाई के लिए सरकार या जेल अधिकारियों को निर्देश नहीं दे सकती। उन्होंने कहा कि सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर राय सरकार को फैसला करना होगा। इस मामले की मुख्य अभियुक्तों में से एक नलिनी को निचली अदालत और उच्चतम न्यायालय ने मौत की सजा सुनाई थी। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद इसकी सजा को कम कर आजीवन कारावास में बदल दिया था। अन्य दोनों दोषियों को अदालत ने आजीवन कैद की सजा सुनाई थी। न्यायाधीश ने नलिनी की समय पूर्व रिहाई वाली याचिका खारिज करने वाले मौजूदा सलाहकार बोर्ड के गठन संबंधी राय सरकार के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि इसका गठन नियमों के विपरीत था। उन्होंने राय सरकार की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि नलिनी को दोबारा किसी तरह की छूट नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि रायपाल को फिर से छूट देने की शक्ित है। नलिनी की गुहार खारिज करते हुए राय सरकार ने सलाहकार बोर्ड का हवाला दिया कि उसे प्रतिबंधित संगठन लिट्टे की सहानुभूति मिली है और (समस्या) बरकरार है। सरकार ने कहा था कि वह नलिनी की याचिका खारिज करने के बोर्ड के फैसले से बाध्य है क्योंकि इस पर पूरी तरह विचार किया जा चुका है। गौरतलब है कि गत 15 सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्री सी एन अन्नादुरई की जन्मशती के मौके पर 1400 से अधिक कैदियों की रिहाई क रते समय राय सरकार ने नलिनी और दो अन्य दोषियों की समय पूर्व रिहाई की याचिका पर विचार नहीं किया था।

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