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लिट्टे का खेल खत्म होने को

श्रीलंकाई सेना ने गुरुवार को आठ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले लिट्टे के अंतिम गढ़ पर घेरा डाल दिया है। सेना का मानना है कि लिट्टे प्रमुख वी प्रभाकरण और उसके अन्य साथी इसी इलाके में छिपे हुए हैं और समुद्र के रास्ते निकल भागने का प्रयास कर सकते हैं। इसे देखते हुए श्रीलंका सरकार ने अपनी नौसेना को भी अलर्ट कर दिया है और उत्तरी मुलाईतिवु से लगे समुद्री क्षेत्र की नाकाबंदी कर दी गई है। श्रीलंकाई नागरिकों की लगातार हो रही मौतों के मद्देनजर भारत के सुरक्षा सलाहकार एम.के.नारायणन व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन शुक्रवार को कोलंबो रवाना होंगे। ये दोनों श्रीलंका सरकार पर बंधकों को तुरंत रिहा करवाने के लिए दबाव बनाएँगे।ड्ढr सेना से घिरे नो फायर जोन के आठ वर्ग किलोमीटर के इस हिस्से में मौजूद लगभग 800 से 00 लिट्टे कार्यकर्ता अब भी प्रतिरोध जारी रखे हुए हैं। सेना के प्रमुख सारथ फोनेस्का ने बताया कि हमारी प्राथमिकता युद्ध क्षेत्र में फँसे हुए तमिल नागरिकों को सही सलामत निकालने की है। इस क्षेत्र में अब भी 15 हाार नागरिकों के फँसे होने की आशंका है। जबकि युद्ध ग्रस्त इलाकों से अब तक एक लाख से ज्यादा नागरिक पलायन कर चुके हैं।ड्ढr श्रीलंकाई नागरिकों की मौतों पर भारत में चिंता बढ़ती जा रही है। हालात की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा बुलाई गई बैठक के बाद विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बताया कि रक्षा सलाहकार व विदेश सचिव शुक्रवार को कोलंबो जाएँगे। ये दोनों अधिकारी श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से मिलेंगे। पीएम की बैठक में रक्षामंत्री एके एंटनी भी नौजूद थे। भारत ने सहायता सामग्री के 40 हाार पैकेट श्रीलंका रवाना कर दिए हैं।

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