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नई उमर के सपनों को यूं मत कुचलिए

इंटर में पढ़ता है मोहम्मद नफे। संजरपुर का ही है। वही संजरपुर जिसे आज हर कोई संदेह की नजर से देख रहा है। नफे इंजीनियर बनना चाहता है। आजमगढ़ के चिल्ड्रन कॉलेज (सीबीएसई) का छात्र है। पीसीएम ग्रुप के साथ तैयारी कर रहा है। कहता है, कोचिंग करूंगा और इंजीनियर बनूंगा। क्रिकेट का भी शौक है। बातचीत का सिलसिला चलता है तो सकुचाते हुए बताता है, सैफ भी यहीं क्रिकेट खेलता था। अच्छा खिलाड़ी था। मुझसे तीन-चार साल सीनियर था। वही सैफ जो दिल्ली ब्लास्ट के सिलसिले में पुलिस की गिरफ्त में है। संजरपुर के कई किशोर आजमगढ़ से हाईस्कूल और इंटर कर रहे हैं। आजमगढ़ के इस गांव में पहले लोग खेती पर निर्भर थे। बटवारा हुआ तो हिस्से की जमीन भी कम होती चली गई। लोग नौकरी के लिए खाड़ी गए। इस तरह धीर-धीर विदेश से इस गांव का रिश्ता जुड़ता गया। पिछले कुछ सालों में यहां एक नया बदलाव आया है। पढ़ाई के लिए बच्चों में ललक पैदा हुई। नई पीढ़ी समझ रही है कि अगर पढ़ लिखकर परदेस गए तो बेहतर नौकरी मिलेगी। लिहाजा आज बच्चे ग्रेजुएशन या इससे पहले ही प्रोफेशनल कोर्स करने को आतुर हैं। यह संवाददाता संजरपुर पहुंचा तो चारों ओर मकानों के बीच एक खुली जगह पर लोग धीर-धीर इस तरह जमा हो गए मानो कोई चौपाल चल रही हो। बड़ी संख्या में किशोर हैं, लेकिन सहमे हुए। मीडिया से बात करने में हिचक रहे हैं। नफे भी बड़ी मुश्किल से एक बुजुर्ग के कहने पर बात करने को राजी हुआ। संजरपुर में कम्प्यूटर को लेकर खासा क्रेा है। युवा पीढ़ी कम्प्यूटर में किसी तरह हाथ आजमाकर आगे बढ़ना चाहती है। कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाने वाले मसीह भी इससे इत्तेफाक रखते हैं। पूछने पर मसीह बताते हैं, सैफ उन्हीं की कोचिंग में था। साइंस मीडियम का था। औसत छात्र था। इतिहास में एमए करने के बाद कम्प्यूटर कोर्स करना चाहता था। कहता था, कम्प्यूटर सीखकर गल्फ (खाड़ी) में नौकरी करूंगा। मसीह को यकीन नहीं होता कि सैफ किसी आपराधिक वारदात में शामिल हो सकता है। अब भी संजरपुर के कई बच्चे उनकी कोचिंग में आते हैं। गांव के लोग नहीं चाहते हैं कि संजरपुर पर कोई दाग लगे। एक जहीन शख्स दिल की बात कुछ यूं बयां करते हैं, अगर दो-चार युवक राह भटक भी गए तो पूर गांव को सजा क्यों दी जा रही है। पुलिस, खुफिया के लोग जो कह रहे हैं उस पर सब यकीन कर रहे हैं, आखिर हमारी बात भी कोई सुनेगा या नहीं। हम अमन के दुश्मन नहीं हैं। यहां की नई पौध नए सपने देख रही है। नफे जसे किशोरों को आगे बढ़ने दीजिए। शक की नजर से देखकर नई पीढ़ी के सपनों को मच कुचलिये।

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  • Web Title: नई उमर के सपनों को यूं मत कुचलिए