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कर्नाटक सरकार नहीं दे सकी सबूत

र्नाटक में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सरकार राज्य में धर्म परिवर्तन की घटना का एक भी सबूत पेश नहीं कर सकी। राज्य में ईसाइयों पर हो रहे हमले और हिन्दू संगठनों द्वारा उनके धर्म स्थलों को बनाये जा रहे निशाने के लिए जिस धर्म परिवर्तन को कारण बताया गया था, उसे साबित करने के लिए राज्य सरकार के पास कोई भी सबूत नहीं था। कर्नाटक में हिंसा प्रभावित जिलों का दौरा कर राजधानी वापस लौटी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) की टीम ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है। ईसाइयों पर हमलों के लिए बजरंग दल को जिम्मेवार ठहराते हुए आयोग ने संगठन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की केंद्र सरकार से मांग की है। ऑल इंडिया क्रिश्चन काऊंसिल के महासचिव जॉन दयाल ने आयोग की रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए बुधवार को कहा कि इससे हमारे उस कथन की पुष्टि हुई है जिसमें हम कहते रहे है कि बाइबिल धर्म परिवर्तन की इजाजत नहीं देता। जांच दल अपनी रिपोर्ट 26 सितम्बर को प्रधानमंत्री को सौंपेगा। आयोग की टीम ने दक्षिण कन्नड़ ,उड़ुपी , मैंगलूर और चिकमगलूर का दौरा किया। इन जिलों में गिराा घरों और ईसाई परिवारों को हिंसक हमलों का शिकार बनाया गया था। आयोग ने हमलों से आहत ईसाई परिवारों में सुरक्षा का भरोसा पैदा करने के लिए जरूरी कदम उठाने की सिफारिश की है। आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद शफी कुरैशी ने हमलों के लिए जिम्मेवार बजरंग दल के खिलाफ दंगा कानून के तहत सख्त कार्रवाई की मांग की है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश करने से परहेा किया है। आयोग के सदस्य श्री जोश ने कहा कि पुलिस और प्रशासन ने यदि अपनी सामान्य डय़ूटी भी निभाई होती तो इन घटनाओं को टाला जा सकता था। आयोग के सूत्रों ने बताया कि ईसाइयों को निशाना बनाने से पहले बजरंग दल ने साहित्य दर्शनी नामक एक भड़काऊ बुकलेट वितरित की थी। जिसमें हिन्दू देवताओं को नीचा दिखाने का वर्णन किया गया था। जांच दल के अनुसार यह बुकलेट राज्य में दंगे का एक कारण बना।

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