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.. मैं पानी में आग लगाने वाला हूं

‘ मत समझो बस गीत सुनाने आया हूं, मैं पानी में आग लगाने वाला हूं, मैं रण में तलवार चलाने वाला हूं ’. लखनऊ से आए कवि वाहिद अली वाहिद ने अपनी इस जोशभरी रचना से हुंकार भरी। हिन्दी को लेकर जब उन्होंने कविता ‘. मैं हिन्दी की ध्वजा उठाने वाला हूं’ सुनानी शुरू की तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सभागार में बुधवार को आयोजित राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जन्मशताब्दी समारोह सह कवि सम्मेलन में आगरा, वाराणसी सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए प्रमुख कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को गदगद किया। इसके पूर्व नगर विकास मंत्री भोला सिंह ने समारोह का उद्घाटन करते हुए कहा कि दिनकर की रचनाओं ने आजादी की लड़ाई के दौरान लोगों को अंग्रजों के खिलाफ लड़ने को प्रेरित किया।ड्ढr ड्ढr आज भी उनकी रचनाएं उतनी ही प्रासंगिक हैं। उनकी राय में प्राचीन पाटलिपुत्र का गौरव लौटेगा। अध्यक्षता सम्मेलन के अध्यक्ष डा.जगदीश पांडेय ने की। स्वागत किया डा.शिववंश पांडेय ने और धन्यवाद ज्ञापन सम्मेलन के प्रधानमंत्री रामनरश सिंह ने किया। इसके बाद कवि सम्मेलन शुरू हुआ। मृत्युंजय मिश्र क रुणेश, नचिकेता, राम उपदेश सिंह विदेह, आगरा के नजर एटवी, वाराणसी के श्रीकृष्ण तिवारी, डा.रविकेश मिश्र, बगहा के अखिलेश नाथ त्रिपाठी, मोतिहारी के अनिल कुमार सिंह, डा.रवीन्द्र राजहंस, डा. मिथिलेश कुमारी मिश्र, बलभद्र कल्याण, आदि ने अपनी रचनाएं सुना सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। क रुणेश ने राजनीति पर चोट करते हुए कहा ‘राजनीति में कला व साहित्य चाहिए’, बलभद्र कल्याण की रचना ‘ चला मैं आकाश में बूंदों का बादल लिये’ और विदेह ने अपनी चर्चित रचना ‘. कुछ बात पुरानी याद आयी गांधी का जमाना याद आया, भारत की कहानी याद आयी’ पर श्रोता वाह-वाह करते रहे। इस अवसर पर समाजसेवी अनिल सुलभ, नृपेन्द्रनाथ गुप्ता, राजकुमार प्रमी, सविता सिंह नेपाली, रणु सिंह, आशा, अर्चना, चंद्रप्रकाश माया,आदि भी उपस्थित थे।

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