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ज्वार-बाजरा व मक्का की भी होगी खरीद

राज्य में खरीफ विपणन मौसम 2008-0े दौरान धान खरीद केन्द्रों पर ही ज्वार-बाजरा और मक्का की भी खरीद होगी। इसके लिए सभी जिलों को किसानों के बीच विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाने का निर्देश दिया है। किसानों से पर्याप्त मात्रा में मक्का मिलने पर राज्य की बीपीएल अंत्योदय आबादी को गेहूं और चावल के साथ बेहतर पोषाहार के रूप में मक्का उपलब्ध कराने की संभावना भी बन सकती है।ड्ढr ड्ढr खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने जागरूकता कार्यक्रम चलाने में कृषि, सहकारिता, जल संसाधन विभाग के सचिवों, प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों के साथ ही भारतीय खाद्य निगम, राज्य खाद्य निगम, बिस्कोमान, नेफेड, एनसीएमएसएफ, केन्द्रीय भंडार निगम, राज्य भंडार निगम, पूर्वाचल बहुराज्यीय सहकारी समिति और चावल मिलर्स एसोसिएशन से भी मदद मांगी है। पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, भागलपुर, सारण, सीवान, खगड़िया, दरभंगा, चंपारण, समस्तीपुर और वैशाली में मक्के की अच्छी पैदावार के आसार हैं। सूत्रों की मानें तो मक्का की पर्याप्त खरीद होने पर राज्य में गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को बेहतर पोषाहार के रूप में मक्का उपलब्ध कराकर गेहूं की कमी की समस्या से निबटा जा सकता है। मैक्रोमोड योजनाअनुदान राशि दोगुनीड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। सरकार ने मैक्रोमोड योजना के तहत समेकित सीरियल विकास कार्यक्रम में अनुदान की राशि को लगभग दूनी करते हुए इसकी मार्गदर्शिका को भी संशोधित कर दिया है। संशोधित दर अक्टूबर से लागू कर दिये जायेंगे। इस योजना के तहत अब किसान गेहूं के बीज पर लागत दर का पचास प्रतिशत अनुदान प्राप्त कर सकेंगे। इसकी अधिकतम सीमा पांच रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई है। पहले यह राशि दो रुपये प्रति किलोग्राम थी। केन्द्र प्रायोजित इस योजना के तहत गेहूं के प्रत्यक्षण के लिए दी जाने वाली राशि भी दूनी कर दी गई है। 0.4 हेक्टेयर भूमि पर प्रत्यक्षण के लिए अब एक हाार की जगह दो हाार की राशि दी जायेगी। संशेाधित मार्गदर्शिका में किसानों के प्रशिक्षण पर होने वाले व्यय को भी बढ़ा दिया गया है। पांच हाार की जगह अब इस मद में 17 हाार रुपये खर्च किये जा सकेंगे। लेकिन इसके साथ सरकार ने कुछ शर्ते भी लगा दी है।ड्ढr ड्ढr हर प्रशिक्षण अब फार्मर्स फिल्ड स्कूल की तर्ज पर दिये जायेंगे। यह बुआई से कटाई तक का प्रशिक्षण होगा। कृषि मंत्री नागमणि ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत मिलने वाली अनुदान की राशि और मैक्रोमोड की अनुदान की राशि में एकरूपता लाने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। दोनों योजनाओं के अनुदान दर में फर्क होने से किसान संशय में रहते थे। अधिकारियों को भी परशानी का सामना करना पड़ता था।ं

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