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धूप, लू और लुक्कड़च, नुक्कड़ पर दीपंकर

एक तरफ चिलचिलाती धूप, तेज लू और लुक्कड़। दूसरी तरफ नुक्कड़ पर दीपंकर। मंच के नाम पर दो चौकी और सिर पर एक चादर। यह चादर भी लू के रहमो-करम पर है। वे भाषण करते हैं और लोगों को लाल लहर पर सवार होकर बदलाव की दावत देते हैं। गुरुवार को माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य नालंदा जिले में चुनावी सभाओं को संबोधित करने निकलते हैं। न हेलीकॉप्टर का झंझट और न गाड़ियों का काफिला। कोई बॉडीगार्ड भी नहीं। साथी के नाम पर केवल जन संस्कृति मंच के नीतिन हैं।ड्ढr ड्ढr पहली सभा नालंदा लोकसभा क्षेत्र के करायपर सराय में है। लेकिन साढ़े नौ बजे ही गाड़ी फतुहा में जाम में फंस जाती है। दीपांकर सभा के आयोजकों को फोन करते हैं- मोटरसाइकिल भेजिए, उसी से आ जाएंगे। मोटरसाइकिल आने के पहले जाम खत्म होती है और कुछ देर से वे करायपर सराय पहुंचते हैं। वहां लोगों की भीड़ है। माले उम्मीदवार शशि यादव भाषण कर रही हैं। दीपंकर के पहुंचते ही नारबाजी होती है। वे लोगों को नया नारा देते हैं- बीपीएल में नाम नहीं, नरगा में काम नहीं तो नीतीश, लालू और रामविलास को वोट नहीं।ड्ढr ड्ढr लू के कारण खड़ा होना मुश्किल है लेकिन गरीब-गुरबा लोग जमीन पर बैठकर उनकी बात सुनते हैं। दीपंकर कहते हैं- नीतीश आपसे 40 महीने की मजदूरी मांग रहे हैं। आपको न्यूनतम मजदूरी मिलती है? लोग जवाब देते हैं- नहीं। वे कहते हैं- तो आप भी इस बार उन्हें मजदूरी मत दीजिए। सभा खत्म होते ही तुरंत थरथरी गांव के लिए रवाना होते हैं। पार्टी का एक नेता कहता है- देर हो गई है, इस सभा को स्थगित कर दीजिए। वे मना करते हैं- लोग इतनी धूप में इंतजार कर रहे हैं। थरथरी में धूप में खड़े होकर भाषण करते हैं। याद दिलाते हैं कि नालंदा का पवन रलवे की परीक्षा देने महाराष्ट्र गया था और उसकी लाश आई। इसके लिए कौन जिम्मेवार है? इस बार बदला लेने और बदलाव के लिए वोट कीािए। इसके बाद मीना बाजार और वहां से एकंगर सराय। डेढ़ बजते-बजते पांच सभाओं को संबोधित कर चुके होते हैं। छह सभाओं को और संबोधित करना होता है। एक कार्यकर्ता खाना लाता है-रोटी और करले की भुंजिया। चलते-चलते रोटी गोल लपेट कर खाते हैं और ड्राइवर को कहते हैं-चलो भाई, रात के पहले रुकनाड्ढr नहीं है।

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