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इतनी संवेदनहीनता क्यों

भारत-नेपाल नए दौर में जब से पुष्प कमल दाहाल नेपाल के प्रधानमंत्री बने हैं वे भारत-नेपाल के बीच 10 के बाद जो समझौते हुए हैं उन तमाम समझौतों की समीक्षा करना चाहते हैं। इस संदर्भ में दोनों देशों के बीच आपसी सहमति भी हो गई है। अब यह तय किया गया है कि दोनों देश नई संधि के लिए समिति बनाएंगे। क्या बदलाव होंगे यह स्पष्ट नहीं है। माओवादियों की आपत्ति उस प्रावधान को लेकर है जिसमें नेपाल की सुरक्षा के मामले में भारत की राय को ज्यादा अहमियत दी गई है। नेपाल एक भूमि अवरुद्ध देश है जिसको भारत की जरूरत अनेक कारणों से है। राघवेन्द्र तिवारी, दिल्ली विश्वविद्यालय मुसीबत पुलिस की पुलिस क्या-क्या कर साहब। अपने डय़ूटी समय में उसे उगाही करनी होती है, नया ग्राहक कौन आया है उसे घुड़की देनी होती है, पुराने ग्राहकों को ऊपर से आर्डर है का बहाना बताना-समझाना होता है, बड़े साहब की फरमाइश आर्डर बताकर सामान एकत्र करना होता है, की गई उगाही का बंटवारा भी कुछ छिपकर करना होता है, एरिया बदल जाने पर आने वाले की सबसे मुलाकात करवाना और उगाही की लिस्ट सौंपना, जो अपने चहेते होते हैं उनके साथ पार्टी ज्वाइन करवाना। बहुत से कामों में ऐसों में व्यस्तता के कारण समय ही नहीं होता जो इन आतंकवादियों की तरफ ध्यान दे पाएं। अशोक गुप्ता दाढ़ीवाला, दिल्ली जरदारी का पैंतरा ‘आतंकवाद को नेस्तनाबूद करके ही दम लूंगा’- जरदारी का यह बयान राजनीतिक स्टंटबाजी है या और कुछ। खर! अगर जरदारी यह ठान भी लें तो सवाल उठता है कि क्या वह ऐसा कर पाएंगे? आतंकवाद और कश्मीर पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति का इतना संवेदनशील किन्तु अनसुलझा मुद्दा है, जिसने भी इसे सुलझाने की कोशिश की उसका राजनैतिक कैरियर खत्म हो गया। हर्षवर्धन, विजय नगर, दिल्ली सोमनाथ जी ने ठीक कहा लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्ाी की जनता की अनदेखी, अक्षम, भ्रष्ट और जुर्म में लिप्त चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुलाने की वकालत माननीय टी. एन. शेषन के चुनाव सुधारों की बेमिसाल श्रंखला में एक नई कड़ी है। वेद, मामूरपुर, नरला, दिल्ली

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