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बम की बमचिक

पिछले दिनों माहौल अति उत्तेजनात्मक रहा। उत्तेजनात्मक क्या कहूं, कुत्तेजनात्मक रहा। मं आतंकवादियों को कुत्ता बोलना चाहता था, मगर इस डर से ठहर गया कि इसस कुत्तों का अपमान हो सकता है। डॉग्स का तो तब भी होता है, आतंकी की न नस्ल का पता होता है, न ठिकान का। काटना ही इन दहशतगर्दों का धर्म है, अमन से नफरत ही ईमान। ये दुमकट कब कहां किस गली से निकल आएं और काट खाएं, कहना मुश्किल है। इस डाउटफुल एंवायरमेंट में अगर अपना पड़ोसी झोले में कद्दू खरीद कर लाता है, तो भी बम का संदेह होता है। आम इंसानी दिमाग जहां की सोच भी नहीं सकता, ये टेररिस्ट्स वहां पर भी बम घुसेड़ मारते हैं। ये बम भी परेशान होते होंगे कि उन्हें छिपान के लिए कैस-कैसे प्लेसेज का इस्तेमाल हो रहा है? आतंकवादी कभी कुकर में बम पकाने लग जाते हैं, कभी पेड़ों पर। और तो और होर्डिंग्स के पीछे विस्फोटक बरामद होते हैं। गोया वहीं पर छिपकर वे आतंकियों की पब्लिसिटी कर रहे हों। इन आतंकवादियों की खोपड़ी खालकर देखी जाए, तो वहां पर भी पचीस-पचास एक्सप्लोसिव्स ब्लास्ट की फिराक में बैठे हुए पाए जाएंगे। भटकों का क्या भरोसा? इनके मां-बाप ने भी कब सोचा होगा कि उनके छोकरे निकले तो किसी और ही पढ़ाई की खातिर थे, मगर बस्तों में बम लेकर आतंकवाद के स्कूलों में जा पहुंचे। प्रेक्िटकल करने लग गए। डस्टबिन्स में बम प्लांट करने लगे। केलों के छिलकों में रखकर इंसानी जिंदगी को रपटान का सबब बन गए। इधर हमारी सोच में भी बड़ा चेंज आया है। पहले अपनी साइकिल स कहीं भी जाते थे, तो मन के अंदर खदर-बदर होती रहती थी कि कहीं खड़ी कर दें और वह तिड़ी हो जाए। टुटही से टुटही साइकिल की चोरी हो जाती थी। बकौल हमारे हलके के थानेदार साहेब, इन साइकिलों की रॉड्स से सॉलिड देसी कट्टे निर्मित होते थे। तब बदमाश आरडीएक्स और जिलेटिन का नाम तक नहीं जानते थे। अबका जमाना और है। आप अपनी साइकिल कहीं भी पार्क कीजिए। बस, उसकी हैंडिल में एक टिफिन बॉक्स टांग दीजिए। फिर देखिए, किस माई के लाल में दम है कि वह हाथ भी लगा दे! सुरक्षा एजेंसियां और मीडिया टूट पड़ेंगे। आदमी से अधिक साइकिल की फोटू टीवी और अखबारों में दीखेगी। पुलिस और उनके आला अधिकारी उसकी सुरक्षा में तैनात मिलेंगे। बम निरोधक दस्ते नंगे पांव भागे चले आएंगे। हालांकि इन बमों की बमचिक ने माहौल बदल के रख दिया है। लकिन इन टेररिस्ट्स की खुद की सोच कब ब्लास्ट होगी, खुदा जाने!

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  • Web Title: बम की बमचिक