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मुद्रास्फीति 12.14 प्रतिशत पर स्थिर रही

इस वर्ष 13 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान देश में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति यानी महंगाई की वार्षिक दर 12.14 प्रतिशत पर स्थिर बनी रही। इस महीने की छह तारीख को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान मुद्रास्फीति ठीक इसी स्तर पर थी। पिछले वर्ष की समान अवधि में डब्ल्यूपीआई आधारित मुद्रास्फीति की दर मात्र 3.51 प्रतिशत थी। एक समय 12.63 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाने के बाद लगातार तीन सप्ताह तक मुद्रास्फीति में हल्की गिरावट आई थी और 30 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान यह दर 12.10 प्रतिशत के स्तर पर आ गई थी। लेकिन छह सितंबर को इसमें फिर से हल्की वृद्धि हुई और यह दर 12.14 प्रतिशत हो गई थी। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय की ओर से गुरुवार शाम को जारी आंकड़ों के मुताबिक 13 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति की वार्षिक दर 12.14 प्रतिशत रही। इस अवधि में प्राथमिक वस्तुओं के मूल्य सूचकांक में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक ईंधन, ऊर्जा और स्नेहकों के मूल्य सूचकांक में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। इस अवधि में सरसों का तेल और वस्त्र जसे विनिर्मित उत्पाद 0.05 प्रतिशत सस्ते हो गए। इस वर्ष 1ाुलाई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान अंतिम आंकड़ों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 12.54 प्रतिशत (तात्कालिक) हो गई। इससे पहले यह दर 11.8प्रतिशत थी। गौरतलब है कि सरकार के प्रशासनिक उपायों और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की कड़ी मौद्रिक नीतियों की वजह से रिकार्ड स्तर पर पहुंच चुकी मुद्रास्फीति में धीरे-धीरे गिरावट आने लगी थी। अब यह स्थिर हो गई है, लेकिन इससे केंद्र सरकार और आरबीआई की चिंता कम नहीं होगी, क्योंकि यह समान्य स्तर 3-4 प्रतिशत से बहुत ज्यादा है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मुद्रास्फीति कम करने के प्रति सरकार का भरोसा जता चुके हैं और आरबीआई के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन भी कह चुके हैं दिसंबर तक मुद्रास्फीति 10 प्रतिशत के आसपास आ जाएगी।

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