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बाढ़ का स्थायी समाधान हो : भाटिया

राज्यपाल आर.एल.भाटिया ने कहा कि बाढ़ से हर साल राज्य की जनता को काफी तबाही होती है इसलिए इसका स्थाई समाधान होना होना चाहिए। सरकार विशेषज्ञों की सलाह को अपनाकर बाढ़ का स्थायी निदान कर। नदियों पर परियोजनाएं बनाकर बिजली का उत्पादन शुरू किया जाए। साथ ही मछली का भी पालन हो। शुक्र वार को पटना संग्रहालय में वंचित समाज के तत्वावधान में पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री की स्मृति में आयोजित व्याख्यानमाला नदी विमर्श को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि नदी की उपयोगिता काफी है। बाढ़ से नई-नई मिट्टियां आती हैं लेकिन इससे जानमाल की क्षति भी होती है। कोसी की बाढ़ से इस वर्ष काफी तबाही मची। लाखों लोग बेघर हो गए और बीमारियां भी फैलीं। इसलिए प्राकृतिक आपदा से हमें सुरक्षा करनी चाहिए। जल की कमी भी देश के सामने एक विकराल समस्या है। राजस्थान के लोगों ने इसका समाधान किया है इससे वहां के लोगों को लाभ भी पहुंचा है। हमें प्रयास करना चाहिए कि जल व जंगल की रक्षा हो। नदियों में शिल्ट जमा होने से बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री डा. संजय पासवान ने कहा कि काफी लंबे समय से नदियों का हरण हुआ है। नदियां काफी उपेक्षित हुई हैं इसलिए विनाशकारी साबित हो रही है। कोसी को मिथिलांचल की बहू मानी जाती है। गंगा मुक्ित आंदोलन के अनिल प्रकाश ने कहा कि शासन की लापरवाही के कारण ही इस वर्ष कुसहा बांध टूटा और बाढ़ से तबाही हुई। लेकिन सरकार फिर से कुसहा बांध को बांधने की गलती हो रही है। विधायक विनो नारायण झा ने कहा कि कोसी मिथिलांचल की शोक नहीं माता है। बाढ़ से बचाव के लिए जल संरक्षण व प्रबंधन की जरुरत है। राजवल्लभ ने कहा कि नदियो ं के क्रम टूटने से ही विनाश की लीला हो रही है। नदियों का पानी संचित करके ही बाढ़ से मुक्ित पा सकते हैं।

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