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कांग्रेस में टल सकती है वोटिंग

अमेरिका में गहराते वित्तीय संकट की छाया भारत-अमेरिका परमाणु करार पर भी पड़ती दिख रही है। शुक्रवार को देश के सबसे बड़े बैंक वाशिंगटन म्युचुअल फंड के दिवालिया हो जाने के बाद नीति निर्माताओं का अब पूरा ध्यान देश को आर्थिक उथल-पुथल से बाहर निकालने पर है और इसके कारण कांग्रेस में परमाणु करार पर शुक्रवार को होने वाले मतदान के टलने के आसार हैं।ड्ढr ड्ढr इस बीच व्हाइट हाउस ने कहा है कि जब तक आर्थिक संकट से निकलने के उपायों पर सहमति नहीं बन जाती है, कांग्रेस का सत्र जारी रहेगा। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कांग्रेस शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने वाली थी। उधर सिनेट के बहुमत दल के नेता हैरी रीड ने कहा कि परमाणु करार से संबंधित विधेयक को अगले सप्ताह ही पेश और पारित किया जा सकता है।ड्ढr आर्थिक संकट से निपटने के लिए बुश प्रशासन व कांग्रेस में 700 अरब डालर के राहत पैकेा पर विचार चल रहा है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने गुरुवार को यहां भारत-अमेरीका असैन्य परमाणु करार सहित कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की लेकिन बैठक में करार को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। बुश और डा. सिंह के बीच यहां व्हाइट हाउस के ओवल आफिस में लगभग 45 मिनट तक चली बैठक में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों सहित आपसी हित के कई क्षेत्रों में व्यापक चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने करार पर कड़ी मेहनत करने के लिए एक-दूसरे को धन्यवाद दिया। बैठक से संतुष्ट नजर आ रहे बुश और डा. सिंह ने बयान दिए लेकिन पत्रकारों के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। बुश ने प्रधानमंत्री के लिए रात्रिभोज का भी आयोजन किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने और डा. सिंह ने भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में बदलाव लाने और परमाणु करार को अंतिम रूप देने के लिए काफी मेहनत की है। बुश ने कहा-भारत एक महान देश है जिसका भविष्य काफी उज्जवल है और उसके साथ बेहतर और मजबूत सामरिक संबंध अमेरिका के हित में हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि करार पर दोनों पक्षों ने काफी मेहनत की है। इसके लिए आपने बहुत हिम्मत दिखाई है। हम चाहते हैं कि यह करार आपकी कसौटी पर खरा उतरे और इसे कांग्रेस की मंजूरी मिले। हम करार को जल्दी से जल्दी कांग्रेस में पारित करवाने के लिए प्रयासरत हैं। प्रधानमंत्री ने अपने बयान में दोनों देशों के रिश्तों को नया आयाम देने विशेषकर करार की दिशा में पहल करने के लिए बुश की भूमिका की सराहना की और उम्मीद जताई कि कांग्रेस दोनों देशों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए करार पर अपनी मुहर लगा देगी। डा. सिंह ने कहा कि जब भारत और अमेरिका के रिश्तों का इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें इसका जिक्र अवश्य होगा कि राष्ट्रपति बुश ने दोनों लोकतांत्रिक देशों को करीब लाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि वह करार का जिक्र इसलिए कर रहे हैं क्योंकि भारत को 34 वर्षों तक परमाणु वनवास झेलना पड़ा है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति बुश के साथ भावनात्मक रिश्ता जोड़ते हुए कहा कि भारत के लोग उन्हें बहुत प्यार करते हैं। बुश ने विभिन्न मामलों पर सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। मार्च 2006 में भारत का दौरा कर चुके बुश ने कहा कि वह अपनी भारत यात्रा को कभी नहीं भूल सकते हैं। डा. सिंह ने कहा कि अब हमारे अमेरिका के साथ सामरिक संबंध हैं और यह सब राष्ट्रपति बुश के मजबूत व्यक्ितगत संकल्प की वजह से ही संभव हो पाया है। भारत को गतिशील लोकतंत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बुश भलीभांति जानते हैं कि कैसे एक अरब से भी अधिक जनसंख्या, भयंकर गरीबी, बहुधार्मिक और बहुजातीय देश होते हुए भी भारत एक गतिशील लोकतंत्र के खांचे में आर्थिक और सामाजिक उत्थान की ओर प्रयासरत है। राष्ट्रपति बुश के कार्यकाल में इसे अपना अंतिम अमेरिका दौरा बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत के लोगों ने राष्ट्रपति बुश को अपना पूरा प्यार दिया और दोनों देशों को करीब लाने में उनकी भूमिका को इतिहास में याद किया जाएगा। बैठक में विदेश सचिव शिवशंकर मेनन, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन, प्रधानमंत्री के विशेष दूत श्याम सरन और अमेरिका में भारत के राजदूत रोनेन सेन ने डा. सिंह को सहयोग दिया। भारत में अमेरिका के राजदूत डेविड मल्फर्ड भी बैठक में मौजूद थे।

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