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बटला हाउस एनकाउंटर पर आरोपों की बमबारी

बटला हाउस प्रकरण को लेकर हर तरफ से बयानबाजी तेज होती जा रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों और शिक्षाविदें के एक समूह ने इस मामले में पुलिस की बातों को फर्ाी बताया है। उनका कहना है कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए, तभी तथ्य सामने आएंगे। पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स और जनहस्तक्षेप ने 1सितंबर को मौके पर एक टीम तथ्यों की जांच के लिए भेजी थी, जिसने अपनी रिपोर्ट में पुलिस के बयान को झूठ बताया। गौरतलब है कि 1सितंबर को बटला हाउस में हुई मुठभेड़ में दो संदिग्ध आतंकी मार गए थे और दिल्ली पुलिस का भी एक ऑफिसर शहीद हो गया था। वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता और टीम के सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा, ‘अगर पुलिस को इस जगह पर दिल्ली ब्लास्ट के आतंकवादियों के होने की पूरी जानकारी थी तो बाहर निकलने के रास्ते को क्यों सील नहीं किया गया और भीतर बैठे युवकों को आत्मसमर्पण के लिए क्यों नहीं कहा। यह सब बातें पुलिस की कार्यवाही पर सवालिया निशान लगाती हैं।’ वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शहाना भट्टाचार्य ने एनकाउंटर में मार गए आतिफ अमीन और मो. साजिद को पुलिस द्वारा दिल्ली ब्लास्ट का आरोपी बताए जाने पर सवाल उठाया है। उनका पूछना था कि एनकाउंटर के चंद घंटों बाद ही सैफ से पूछताछ या मौके से मिले लैपटॉप की जांच से पहले ही पुलिस ने यह बात साबित कैसे कर दी?

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  • Web Title: बटला हाउस एनकाउंटर पर आरोपों की बमबारी