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वित्तीय संकचचट ने बढ़ाईं दिल कचची मुसीबतें

अमेरिका और भारत समेत दुनिया भर में जारी आर्थिक मंदी और उतार-चढ़ाव नाजुक हृदय को गंभीर झटक दे रहा है जिसके कारण दिल के दौरे के खतरे बढ़ गए हैं। विशेषज्ञों ने विश्व हृदय रोग दिवस की पूर्व संघ्या पर आर्थिक मंदी और आर्थिक संकटों के मद्देनजर लोगों को खास तौर पर दिल के मरीजों को खास तौर पर एहतियात बरतने की सलाह दी है। ताजा अघ्ययनों से इस बात की पुष्टि हुई है कि शेयर बाजार में उतार-चढाव बढ़ती महंगाई और आर्थिक मंदी के कारण आपके बैंक बैलेंस और कॅरियर पर पर जो मार पड़ती है उससे कहीं गहरी मार सेहत और दिल पर पड़ती है। ज्ञातव्य है कि लोगों को हृदय के खतरों के प्रति जागरूक बनाने के लिए रविवार को दुनिया भर में विश्व हृदय दिवस मनाया जा रहा है जिसका मुख्य विषय वस्तु है ‘खतरों को जानें’ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. पुरूषोत्तम लाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों के दौरान छाती में दर्द रक्त चाप हृदय की धड़कनों में असामान्यता और हृदय की अन्य समस्याओं को लेकर उनके पास आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है और इसका एक कारण आर्थिक और सामाजिक संकट भी है। उन्होंने कहा कि आर्थिक संकटों की मार न केवल कमाने वाले लोगों पर बल्कि उससे कहीं अधिक बढ़ने और महिलाओं पर पड़ती है। भारत के सबसे अधिक एंजियोप्लास्टी करने का श्रेय हासिल करने वाले डा. लाल ने हाल में किए गए एक अध्ययन के हवाले से कहा कि ऐसे सबूत मिले हैं कि जिस दौर में बहुत तेजी से आर्थिक बदलाव होते हैं आर्थिक समस्याएं बढ़ती है और नौकरियों पर संकट बढ़ती है उस दौर में दिल के दौरे एवं अन्य कारणों से मृत्यु दर बढ़ जाती है। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रापिकल मेडिसीन के प्रोफेसर मैट्रिक मैककी के नेतृत्व में पूर्व सोवियत संघ में किए गए अध्ययन से पता चला कि पूर्व सोवियत संघ के उन क्षेत्रों में जहां बहुत तेजी से आर्थिक बदलाव हुए और लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा वहां मृत्यु दर में बहुत अघिक तेजी आ गई।ड्ढr ड्ढr विशेषज्ञों का कहना है कि संकट पूर्ण एवं तनावपूर्ण स्थितियों का असर पुरूषों की तुलना में महिलाओं पर अधिक असर पड़ता है। अन्य देशों की तरह भारत में किए गए अध्ययनों से पता चला है कि रोजगार और पैसे पर संकट के दौर में हृदय रोग मौत विकलांगता और बीमारी के एक प्रमुख कारण बन गए हैं। देश के प्रमुख शहरों दिल्ली, जयपुर, मुंबई, चेन्नई, बेंगलूर और तिरूवनंतपुरम में किए कई अध्ययन से पता चला है कि 35 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में से करीब दस प्रतिशत लोग कोरोनरी आर्टरी रोगों से ग्रस्त हैं। हालांकि ग्रामीण भारत में हृदय रोगों का प्रकोप शहरों की तुलना में कम है लेकिन इसमें भी तेजी आ रही है। मेट्रो ग्रुप ऑफ हास्पिट्ल्स के चैयरमैन तथा मेट्रो हास्पिटल्स एंड हार्ट इंन्स्टीच्यूट के निदेशक डा. लाल ने कहा कि मौजूदा समय में हृदय रोगों के प्रकोप में आ रही तेजी के मद्देनजर देश भर में हृदय रोगों की जांच के लिए व्यापक कार्यक्रम ‘स्क्रीनिंग प्रोग्राम’ चलाया जाना चाहिए ताकि लोगों में समय रहते ही हृदय रोगों के लक्षणों की पहचान की जा सके और दिल के दौरे को कम किया जा सके। उन्होंने बताया कि उनके नेतृत्व में हृदय रोगों की जांच की आसान एवं सस्ती विधि ‘मेट्रो कोरोनरी स्क्रीनिंग’ का विकास किया गया है जो हृदय रोगों की पूर्व पहचान में कारगर है।

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