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मूत्र जांच से फेफड़े के कैंसर का चलेगा पता

धूम्रपान करने वालों के मूत्र में मौजूद दो रसायनों नाइट्रोसैमाइन, कोटीनाइन के स्तर की जांच से यह पता लग सकेगा कि फैफड़े का कैंसर होने का खतरा है या नहीं। इसका खुलासा धूम्रपान करने वालों के ऊपर किए गए परीक्षण से हुआ है। अमेरिकन एसोसिएशन आफ कैंसर रिसर्च की हाल ही में डेनवर में हुई बैठक में वैज्ञानिकों ने बताया कि शंघाई में वर्ष 10 में 18 हजार से अधिक लोगों तथा 10 में सिंगापुर में 63 000 लोगों के रक्त और मूत्र के नमूने लिए गए और फिर कई वषोर्ं तक उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी गई। इसके बाद हाल ही में वैज्ञानिकों ने यूनीवर्सिटी ऑफ मिनीसोटा के अनुसंधानकर्ताआें के साथ मिल कर 246 ऐसे लोगों की पहचान की जो धूम्रपान करते थे और उन्हें फेफड़े का कैंसर हो गया था। साथ ही 245 ऐसे लोगों की भी अलग से पहचान की जो धूम्रपान करते थे लेकिन उन्हें कैंसर नहीं हुआ था। इन सभी लोगों के रक्त और मूत्र के नमूने उस समय ले लिए गए थे जब उनकी कैंसर जांच नहीं हुई थी और किसी को यह नहीं पता था कि उन्हें फेफड़े का कैंसर हुआ है या नहीं। जिन लोगों को बाद में कैंसर हुआ उनके मूत्र के नमूनों में उन लोगों के मूत्र के नमूनों की तुलना में दोनों रसायनों की मात्रा आठ गुना से भी अधिक पाई गई जिन्हें कैंसर नहीं हुआ। इस अध्ययन की खास बात यह रही कि पहले ऐसे सभी लोगों के मूत्र के नमूने ले लिए गए जो धूम्रपान करते थे और फिर कुछ साल इंतजार किया गया। इसी अंतराल के दौरान कुछ लोगों को फेफड़े का कैंसर हो गया और कुछ को नहीं। जांच के दौरान पता चला कि जिन लोगों को कैंसर हुआ उन लोगों के मूत्र में इन दोनों ही रसायनों की मात्रा उन लोगों की तुलना में कई गुना अधिक पाई गई थी जिन्हें कैंसर नहीं हुआ। अध्ययन के दौरान जिन दो रसायनों की जांच की गई वे हैं नाइट्रोसैमाइन जिसे एनएनएएल भी कहा जाता है और दूसरा कोटीनाइन। हालांकि कोटीनाइन अपने आप में कार्सीनोजन नहीं है। कार्सीनोजन वे तत्व होते हैं जो कैंसर को बढ़ने में मदद करते हैं। लेकिन मूत्र में इसकी अत्यधिक मात्रा इसका स्पष्ट संकेतक होती है कि कोई व्यक्ित कितना और कैसे धूमपान करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल इस जांच में करीब दस हजार रूपए का खर्च आएगा लेकिन उन्हें आशा है कि भविष्य में इस खर्च में कमी आएगी और यह इसे घटाकर करीब एक हजार रूपए तक लाया जा सकेगा। अध्ययन से यह भी पता चला है कि धूम्रपान करने वाले औसतन 17 प्रतिशत पुरूष और 11 प्रतिशत महिलाएं फेफड़े के कैंसर का शिकार होते हैं। धूम्रपान करने वालों के मूत्र में मौजूद रसायनों के स्तर को बायोमार्कर के रूप में मान कर इतने अधिक लोगों पर किया गया अब तक का यह पहला अध्ययन है।

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  • Web Title: मूत्र जांच से फेफड़े के कैंसर का चलेगा पता