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पार हो गया पिछले साल का आँकड़ा

बलरामपुर मैदान में राष्ट्रीय पुस्तक मेला रविवार को समाप्त हो गया लेकिन आरम्भ में दो दिनों तक वर्षा से बाधित होने के बावाूद इसने पिछले साल के बिक्री के आँकड़े को पार कर लिया। आयोकों का दावा है कि पिछले साल हुई एक करोड़ रुपए कीोगह इस वर्ष एक करोड़ 15 लाख रुपए की पुस्तकें बिकी हैं। उत्साहित आयोकों ने अगले वर्ष मोतीमहल में और बड़े पैमाने पर इसे आयोित करने का निश्चय किया है।ड्ढr रविवार को सायंकाल समापन समारोह में महापौर दिनेश शर्मा ने दोहराया कि पुस्तक मेला के आयोक अगर चाहे तो अगले वर्ष निगम का कोई स्थान इसके आयोन के लिए नि:शुल्क उपलब्ध करायाोाएगा। हालाँकि उन्होंने कहा कि यह घोषणा मैंने पिछले वर्ष भी की थी, लेकिन लक्ष्मण मेला स्थल प्रदेश सरकार के पास चलेोाने और नए लक्ष्मण मेला स्थल पर पानी भर होने से इसे मेला के लिए नहीं दियाोा सका।ड्ढr समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मो. इलियास एवं कैलाशोोशी को सम्मानित किया गया,ोबकि विशेष सहयोग के लिए वितरक यू.बी.एस. पब्लिशर्स डिस्टीब्यूटर्स के क्षेत्रीय प्रबन्धक आर.के. सेठी, अंग्रेाी के प्रकाशक ओरियण्ट ब्लैक स्वान के क्षेत्रीय प्रबन्धक सांय टिक्कू, हिन्दी के प्रकाशक किताब घर के रााीव शर्मा एवं उर्दू के प्रकाशक नेशनल कॉउन्सिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वे के वी.सिद्दीकी को सम्मानित किया गया।ड्ढr इस मौके पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी आर.के. मित्तल, सीएमएस केोनसम्पर्क अधिकारी हरिओम शर्मा, कवि सव्रेश अस्थाना, संयोक देवराा अरोड़ा, सह संयोक मनो सिंह चन्देल एवं उमेश ढल ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन मोनिका चौहान ने किया। कहीं ‘राग दरबारी’ तो कहीं ‘लज्जा’ लखनऊ। राष्ट्रीय पुस्तक मेला में एक बार फिरोहाँ ‘मैला आंचल’, ‘राग दरबारी’, ‘गुनाहों का देवता’ ौसी लोकप्रिय पुस्तकों की अच्छी बिक्री हुई वहीं विवादित लेखिका तस्लीमा नसरीन की ‘लज्जा’, चेतन भगत के अंग्रेाी से अनुदित हुए उपन्यास भी खूब बिके। ऑक्सफोर्ड के शब्दकोश हाथों-हाथ लिए गए। शिवानी एवं नरन्द्र कोहली के उपन्यास, निदा फााली, बशीर बद्र के गाल संग्रह और लेखिकाओं की प्रतिनिधि कहानियाँ भी पसन्द की गईं।ड्ढr मेले के अन्तिम दिन विभिन्न स्टॉलों परोब पुस्तकों की बिक्री के बार मेंोानकारी ली गई तो रााकमल, राधाकृष्ण और लोकभारती के संयुक्त स्टॉल के प्रतिनिधि ने बताया कि श्रीलाल शुक्ल का ‘राग दरबारी’, रणु का ‘मैला आंचल’ खूब बिका। शिवानी की विभिन्न पुस्तकें और काशीनाथ सिंह का ‘काशी का अस्सी’ भी खूब पसन्द किया गया। वाणी के स्टॉल पर तस्लीमा नसरीन के ‘लज्जा’ के अतिरिक्त नरन्द्र कोहली का ‘महासमर’, निदा, बशीर बद्र व अहमद फराा के संग्रह खूब बिके। प्रभात प्रकाशन के स्टॉल पर चेतन भगत के ‘वन नाइट एट कॉल सेण्टर’ व ‘फाइव प्वाइण्ट समवन’ के हिन्दी अनुवादों की धूम रही तो किताब घर में प्रतिनिधि कहानियों खासकार लेखिकाओं के संग्रहों को पसन्द किया गया। ऑक्सफोर्ड के स्टॉल पर हाल में आई अंग्रेाी-हिन्दी शब्दकोश की लगभग 350 प्रतियाँ बिक गईं।

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