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मजमून से फिर मुश्किल खड़ी

भारत-अमेरिकी एटमी करार को 2से प्रतिनिधि सभा की मंजूरी मिल गई है। उम्मीद की जा रही है कि अमेरिकी कांग्रेस के दूसरे सदन सीनेट में भी सोमवार को इसे मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद एटमी करार पर दोनों देशों के विदेश मंत्री हस्ताक्षर कर सकेंगे।ड्ढr ड्ढr हालांकि जिस रूप में अमेरिकी कांग्रेस करार को मंजूरी दे रही है, उसके चलते भारत अमेरिका से एटमी ईंधन एवं रिएक्टर ही ले सकेगा। प्रोसेसिंग व एनरिचमेंट टेकनोलॉजी हासिल नहीं कर पाएगा। ईरान और उत्तर कोरिया के नाम पर अमेरिकी राजनीतिज्ञ, विशेषकर अश्वेत नेता बराक ओबामा की पार्टी के सदस्य यह सुविधा भारत को कतई देने को तैयार नहीं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस मसले पर अपनी असहमति जॉर्ज बुश से व्यक्त कर चुके हैं। करार को मंजूरी देने वाले बिल की भाषा के कुछ अंश पर भारत को आपत्ति है। नतीजतन विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी को अचानक वाशिंगटन भागना पड़ा है। इससे पहले अचानक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम. के. नरायणन को दौड़ाया गया था। इन सब आशंकाओं के बीच कयास लगाये जा रहे हैं कि एटमी करार पर हस्ताक्षर के लिए विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस का 3 अक्तूबर को भारत आने का कार्यक्रम टल सकता है। एटमी करार को इसी सत्र में पारित कराने के लिए राइस ने कड़ी मशक्कत की है। इस चक्कर में उन्होंने प्रतिनिधि सभा के विदेशी मामलों की समिति के अध्यक्ष हॉवर्ड बरमन को एसा वायदा किया, जिससे भारत खुश नहीं है। स्मरणीय है कि एटमी करार को मंजूरी देने वाला बिल सीनेट में पहले गया। ठीक वैसा ही बिल प्रतिनिधि सभा में रखने से हॉवर्ड ने इंकार कर दिया और कुछ नई शर्ते जोड़ दीं। उन शर्तो को हटाने के लिए वे तभी राजी हुए जब राइस ने उन्हें भरोसा दिया कि भारत को एनरिचमेंट और प्रोसेसिंग टेकनोलॉजी नहीं दी जाएंगी। वायदा किया कि वे नवंबर में न्यूक्िलयर सप्लायर्स ग्रुप की बैठक में तत्परता से इस रोक के लिए प्रयास करंगी। कोंडोलीजा के इस आश्वासन के बाद ही वे प्रतिनिधि सभा में बिल पेश करने के लिए राजी हुए।ं

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