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एचआईवी संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ना चिंताजनक

प्रसिद्ध फिजीिशयन पद्मश्री डा.एस.एन.आर्या ने बताया कि राजधानी के एक बड़े डॉक्टर के पास सप्ताह में 10-15 एचआईवी संक्रमित इलाज के पहुंच रहे हैं। यह चिंताजनक स्थिति है। ऐसे मरीजों की सेवा में चिकित्सकों को घबड़ाने की बात नहीं है। एचआईवी संक्रमित एक हजार मरीजों का ऑपरशन करने में तीन डॉक्टरों को संकक्रमित होने की आशंका रहती है। यह भी तब जब डॉक्टर ऑपरशन करने के दौरान यूनिवर्सल सेफ्टी किट का प्रयोग नहीं करते हो ंतब।ड्ढr ड्ढr डा .आर्या रविवार को आईएचओ (रतनई) द्वारा पोस्ट एक्सपोजर प्रोफाइलेक्सीस (पीईपी) विषय पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अस्पतालों और नर्सिग होम में पारा मेडिकल स्टाफ और नर्सो के लिए इस प्रकार के बचाव की दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। संक्रमित मरीज का खून अथवा किसी प्रकार का द्रव्य शरीर पर पड़ जाए तो उसे अच्छी तरह से साबुन-पानी से धो लें। इस मौके पर आईएचओ के चिकित्सा निदेशक डा.दिवाकर तेजस्वी ने बताया कि एचआईवी संक्रमित सुई के चुभने के छह घंटे के अन्दर पीईपी दवाओं का सेवन आरम्भ कर दिया जाए तो संक्रमण की आशंका 80 फीसदी कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि इसकी तुलना में हेपेटाइटिस बी वायरस की संक्रमित सुई चुभने से 30-50 प्रतिशत संक्रमण की संभावना होती है।ड्ढr ड्ढr प्रस्द्धि सर्जन डा. नरन्द्र प्रसाद ने अपने लम्बे अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि सावधानी रखने के कारण अभी तक संक्रमण की गुंजाइश नहीं हुई। उन्होंने बताया कि फिलहाल वे सप्ताह में 3-4 हेपेटाइटिस बी मरीजों का ऑपरशन करते हैं। प्रस्द्धि महिला रोग विशेषज्ञ डा.शांति राय ने बताया कि अब गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच करायी जाती है। ऐसी गर्भवती महिलाओं का सिजेरियन विधि से प्रसव कराया जाए तो बच्चे को संक्रमण की आशंका कम रहती है। उन्होंने बताया कि मां से बच्चे को होनेवाला संक्रमण पूरी तरह से रोका जा सकता है। संवाददाताओं को डा.के.के.शरण और डा.किरण शरण ने भी संक्रमण की रोकथाम की जानकारी दी।ं

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