अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

स्वर्णरखा को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दें : सीएम

सीएम शिबू सोरन ने 13वें वित्त आयोग से कहा कि नया राज्य होने की वजह से झारखंड को केंद्र की ओर से विशेष मदद की दरकार है। केंद्र की आर्थिक और प्रशासनिक सहायता के बिना राज्य का सर्वागीण विकास संभव नहीं है। सीएम ने स्वर्णरखा परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर इसके लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना वर्ष 10 में 0 करोड़ की लागत पर शुरू की गयी थी, लेकिन आज तक पूरी नहीं हुई है। वर्तमान में इसकी लागत 4540 करोड़ रुपये हो गयी है।ड्ढr सोरन ने कहा कि राज्य सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों पर प्रत्येक वर्ष 700-800 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस चलते विकास के लिए संचित राशि का एक बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। रल परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार पर दो हजार करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ है। वेतन आयोग की अनुशंसा के बाद राज्य में पड़नेवाले वित्तीय बोझ को कम करने के लिए भी सीएम ने केंद्रीय मदद पर जोर दिया। आयोग को उन्होंने जानकारी दी कि राज्य के लगभग 45 प्रतिशत प्रशासनिक एवं तकनीकी पद खाली हैं। मानव संसाधन के बिना विकास कार्य में गति लाना संभव नहीं है। अभी भी झारखंड के कई प्रमंडल रल की सुविधा से वंचित है। उन्होंने राज्य में नयी परियोजनाएं चलाने के लिए आयोग से सिफारिश का भी आग्रह किया।ड्ढr उग्रवाद से निजात के लिए केंद्र 500 करोड़ प्रतिवर्ष दे : स्टीफन उप मुख्यमंत्री स्टीफन मरांडी ने आयोग से आग्रह किया कि राज्य के उग्रवाद प्रभावित जिलों में रोगजारोन्मुखी योजना लागू करने के लिए प्रत्येक साल पांच सौ करोड़ रुपये देने की अनुशंसा की जाये। आयोग के साथ बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि राज्य के 24 में से 18 जिले इससे प्रभावित हैं। 32 फीसदी थाना नक्सली हिंसा से जूझ रहे हैं। इससे राज्य के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। औद्योगिक विकास के लिए आधारभूत संरचना की कमी है। ऊर्जा के क्षेत्र में यह राज्य काफी पिछड़ा है। कोयले की प्रचुरता के बाद भी विद्युत उत्पादन की व्यवस्था नहीं है। आधी से अधिक आबादी गरीबी रखा से नीचे है। राज्य के सात जिले देश के सबसे गरीब जिलों की श्रेणी में है। वित्त मंत्री मरांडी ने सरकारी और गैरसरकारी बड़ी कंपनियों द्वारा स्टॉक ट्रांसफर के माध्यम से बड़े शहरों में वाणिज्यिक कार्रवाई करने का भी मामला उठाया। कहा कि उद्योगपतियों को भूमि, परिवहन, बिजली जैसी सुविधा राज्य सरकार देती है, लेकिन स्टॉक ट्रांसफर करने से वाणिज्य कर के रूप में राज्य को अपेक्षित राशि नहीं मिल रही है। डिप्टी सीएम ने मूल आधारित रॉयल्टी तय कराने का भी अनुरोध किया।ड्ढr उन्होंने छठे वेतन आयोग की अनुशंसा के बाद अतिरिक्त खर्च होनेवाले 1300 करोड़ रुपये का 50 प्रतिशत केंद्रीय सहायता की वकालत की।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: स्वर्णरखा को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दें : सीएम