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धूम्रपान पर 2 अक्तूबर से प्रतिबंध को हरी झंडी

सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध कानून रोकने के सिगरेट कंपनियों के सभी प्रयास विफल हो गए जब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उनकी मांग खारिा कर दी। कोर्ट ने कहा कि देश भर में कोई भी हाईकोर्ट इस संबंध में किसी याचिका पर विचार नहीं करेगा। सिगरेट लाबी ने सोमवार को सवा दो बजे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सिगरट प्रतिबंध को रोकने का प्रयास किया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश से इस पर भी रोक लग गई है। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित सभी चारों याचिकाएं सुप्रीमकोर्ट में स्थानांतरित कर दीं। जस्टिस बीएन अग्रवाल और जीएस सिंघवी की खंडपीठ ने लगभग एक घंटे तक केंद्र सरकार (स्वास्थ्य मंत्रालय) और सिगरट कंपनियों व होटल एसोसिएशन की बहस सुनी। बहस में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि सरकार इंस्पेक्टर राज को वापस ला रही है। उन्होंने कहा कि स्मोकिंग बैन से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन इसके रूल बहुत सख्त बना दिए गए हैं। इसमें निजी दफ्तरों जसे वकील या आर्किटेक्ट के दफ्तरों को शामिल किया गया है। यदि दफ्तर में किसी ने सिगरट सुलगाई तो दफ्तर के मालिक वकील या आकिटेक्ट को 200 रुपये जुर्माना देना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह बिलुकल गलत है। लेकिन साल्वे इस बात का जवाब नहीं दे सके कि मई में अधिसूचित किए गए नियमों को उन्होंने सितंबर में चुनौती क्यों दी। 2 अक्तूबर से सार्वजनिक स्थानों जसे अस्पताल, सरकारी दफ्तर, लाइब्रेरी, निजी आदि में धूम्रपान पर पूर्ण रोक लग जाएगी। होटलों और रस्त्रां में धूम्रपान के लिए अलग से कमर बनाने होंगे और इन कमरों में सर्विस नहीं की जाएगी। यहां तक कि रस्त्रां के बाहर आस-पास भी धूम्रपान पर पाबंदी होगी।

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  • Web Title: धूम्रपान पर 2 अक्तूबर से प्रतिबंध को हरी झंडी