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शौचालय बनवाने को महिलाएं जागरूक

मिदनापुर की हरिप्रिया भारती को खुले में शौच जाना पसंद नहीं था इसलिए उसने घर में ही शौचालय बनाने की ठानी और अपनी मां के घर से मुर्गी के अंडे और मुर्गी लाकर बेचने लगी। पैसे जमा कर उसने घर में ही शौचालय बनवा लिया। इसी इलाके की एक अन्य महिला जब शाम को खुले में शौच के लिए गई तो उसके जोंक चिपट गई। लौटकर शौचालय बनवाने के लिए इतनी महाभारत की कि सुबह होते ही पति ने घर में शौचालय बनवाने के लिए पैसे जमा करा दिए। एक नवविवाहिता ने सास को धमकी दी कि घर में शौचालय न बनवाने पर वह मायके चली जाएगी। अपने घरों में शौचालय बनवाने के लिए पश्चिम बंगाल में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे जागरूक हो चुके हैं। देश भर में स्वच्छता के मामले में पश्चिम बंगाल काफी आगे है। पंचायत, गैर सरकारी संगठन, महिलाओं के स्वास्थ्य समूह और राज्य सरकार घरों और स्कूलों में शौचालय बनवाने, स्वच्छ पेयजल और धुएंरहित चूल्हे बनाने के लिए मिलकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में 76 प्रतिशत घरों में शौचालय हैं। कुछ जिलों में 0 प्रतिशत से अधिक घरों और स्कूलों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। शौचालय और साफ-सफाई की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न होने की सर्वाधिक मार महिलाओं पर पड़ती है। इसका संबंध उनकी निजता, इज्जत और सुरक्षा से जुड़ा है। बच्चों में डायरिया, टायफायड, पीलिया, मलेरिया और हुकवार्म जसी 80 प्रतिशत बीमारियां इसी कारण होती हैं। शौचालय के अभाव में लड़कियां स्कूल नहीं जा पातीं। यूनिसेफ की जल, पर्यावरण और स्वच्छता प्रमुख लिजेट बर्जर ने कहा कि हालांकि बंगाल में स्थिति बेहतर है पर कई चुनौतियां हैं जिनका हमें मुकाबला करना है।

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