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पंचायती राज अधिनियम को चुनौती देने वाली अर्जी खारिचा

पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज पंचायत अधिनियम की धारा 136(छ) को चुनौती देने वाली अर्जी को खारिज कर दिया। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेन्द्र मल लोढा तथा न्यायमूर्ति किशोर कुमार मंडल की खण्डपीठ ने मनोज बिंद की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।ड्ढr इसके पूर्व आवेदक के वकील प्रशांत सिन्हा न अदालत को बताया कि पंचायत कानून 2006 क अनुसार किसी भी अपराध के लिए 6 महीने से अधिक अवधि के लिए सजा होने पर कोई भी सजायाफ्ता उम्मीदवार पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते है।ड्ढr ड्ढr उनका कहना था कि दो प्रकार के अपराध होते है एक माइनर तथा दूसरा मेजर। माइनर अपराध के लिए काफी कम अवधि की सजा देने का प्रावधान है। नए कानून के अनुसार माइनर क्राइम के दोषी भी पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते जबकि माइनर क्राइम के दोषी विधान सभा तथा लोक सभा का चुनावलड़ सकते है। उनका कहना था कि संविधान के तहत बनाए गए पंचायत कानून से इस धारा को समाप्त का नए धारा को जोड़ना चाहिए ताकि माइनर क्राइम के दोषी उम्मीदवार पंचायत चुनाव लड़ सकें। लेकिन अदालत ने श्री सिन्हा के दलील को नामंजूर करते हुए पंचायत कानून की धारा 136 (छ) को वैद्य ठहराया। ड्ढr अफसरों पर कार्रवाई से कृषि सेवा संघ नाराजड्ढr पटना(हि. ब्यू.)। पदस्थापन में वरीयता की अनदेखी और अधिकारियों पर हो रही दण्डात्मक कार्रवाई से राज्य कृषि सेवा संघ नाराज है। संघ ने विभाग की इस नीति के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। आंदोलन के पहले चरण में 14 से 18 अक्टूबर तक कृषि सेवा संघ से जुड़े अधिकारी काला बिल्ला लगाकर काम करंगे। इसके बाद 24 और 25 अक्टूबर को ये अधिकारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। अगर बात नहीं बनी तो 10 नवम्बर से कृषि सेवा संघ बेमियादी हड़ताल पर चला जायेगा। संघ के उपाध्यक्ष गणेश राम की अध्यक्षता और महासचिव आदित्य नारायण राय की उपस्थिति में हुई सदस्यों की बैठक में लिये गये फैसलों की जानकारी देते हुए संयुक्त सचिव संजय कुमार ने बताया कि कृषि विभाग में अधिकारियों की पदस्थापना में वरीयता की लगातार अनदेखी की जा रही है। निदेशक उद्यान, निदेशक भूमि संरक्षण और निदेशक पीपीएम के पदों पर जिन अधिकारियों की पोस्टिंग की गई है ये कृषि सेवा की मूल कोटि और अन्य सेवा संवर्ग के पदाधिकारी हैं। कृषि सेवा के वर्ग एक में लगभग 50 अधिकारी उनसे वरीय हैं। राज्य कृषि सेवा संघ विभाग के इस फैसले के विरोध में अंदोलन करगा। उनकी मांग है कि विभाग के वरीय पदों पर पोस्टिंग वरीयता के अनुसार हो। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा अब तक दस जिला कृषि पदाधिकारियों के खिलाफ दण्डात्मक कार्रवाई का आदेश निर्गत किया गया है। संघ की मांगों में विभाग की इससे संबंधित अधिसूचना संख्या 507 दिनांक एक जुलाई 2008 को वापस लेना भी शामिल है।

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  • Web Title: पंचायती राज अधिनियम को चुनौती देने वाली अर्जी खारिचा