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जोधपुर शहर में हर तरफ छाया मौत का सन्नाटा

ाब पूरा देश नवरात्रों के उल्लास में डूबा है, जोधपुर शहर में मौत का सन्नाटा पसरा हुआ है जिसे रह-रह कर किसी एक कोने से उठने वाली कोई चीख तोड़ देती है। अरै पप्पू कठै है, पप्पू कठै है कहती हुई एक महिला बदहवास हालत में इधर से उधर भाग रही थी तो थोड़ा नीचे उतरकर एक बच्ची रोते हुए अपने पिता से उठने के लिये कह रही है। पापा उठो ना की उसकी कातर पुकार हर किसी का कलेजा चीर रही थी। ऐतिहासिक मेहरानगढ़ किले में स्थित चामुण्डा मन्दिर में मंगलवार को सुबह की पहली किरण के साथ मौत ने ऐसा ताण्डव रचा कि सूर्य नगरी के कई घरों के चिराग बुझ गए। मंगलार सुबह देवी के दर्शनों के लिये गई हाारों लोगों की भीड़ में मची भगदड़ में मरने वाले सभी पुरुष हैं और अधिकतर 15 से 30 साल की उम्र के। हादसे की खबर सुनते ही दूसर रास्ते से मन्दिर जा रही महिलाएं रम्पार्ट की तरफ दौड़ पड़ीं। कोई अपने पति को तो कोई बेटे और भाई को पुकार रही थीं। थोड़ी देर में शवों एवं घायलों को लेकर आते लोगों के साथ ही चीख-पुकार मच गई। आसपास के मोहल्लों एवं बाकी शहर से भी लोग किले की तरफ मदद और अपने परिचितों की कुशलक्षेम जानने के लिये दौड़ पड़े। किले के पास चांद बावड़ी में रहने वाली वंदना अवस्थी ने बताया कि लोग अपने परिान की पहचान करने के लिये शवों एवं घायलों को ले जाने वालों को रोक-रोक कर देख रहे थे। बचाव कार्य में लगे लोग रैम्पार्ट पर फिसलने की परवाह किये बिना घायलों को हाथों में ही लेकर उतर रहे थे। सबसे ज्यादा मौतें सूरसागर, मसूरिया एवं प्रतापनगर के युवकों की हुई हैँ। मरने वालों में महाराष्ट्र एवं प.बंगाल से रोी-रोटी की तलाश में आए प्रवासी मजदूर भी हैं। यह लोग घोडों का चौक, घांचियों का बास, रावतों का बास एवं सुनारों का बास में आभूषण निर्माण का काम करते हैं। उधर जोधपुर के श्मशानो में सिर्फ सिसकियां सन्नाटे को तोड़ रही थीं। मंगलवार शाम को जब शिवांची गेट कागा पहाड़ी और चांदपोल श्मशान घाटो में शव पहुंचे तो वहां तिल रखने के लिए जगह नही थी। सिसकियां सन्नाटे को चीर रही थीं। शव जलाने के लिए लकड़ियों का इंतजाम भी मुश्किल था। मथुरा दास अस्पताल में कार्यरत दिनेश जोशी समय निकाल कर अपने बुआ के लड़के रौनक के अंतिम संस्कार में शिवांची गेट पहुंचे तो बड़ी संख्या में शवों को देखकर चकरा गए। श्मशान में रखे एक व्यक्ित के शव के बारे में लोगों ने बताया कि इसके तीन बड़े तथा एक छोटे बच्चे की भी मौत हो गई है। हादसे के समय छोटा बच्चा पिता के हाथ में था। दिनेश जब वापस अस्पताल ड्यूटी पर आया तो कई घायल हाथ-पांव टूटने के कारण दर्द से कराहते मिले। उसको हेल्प लाइन की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। शहर में नवरात्रा स्थापना की खुशी काफूर हो गई तथा गरबा आदि के सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। बाजार में दुकाने बंद हो गईं। अस्पताल से जब घरों में शव पहुंचे तो हाहाकार मच गया। चामुण्डा मंदिर हादसे की खबर सुनकर लोग मदद के लिए अस्पताल की और दौड पड़े। आमतौर पर सवारियों से मोटा किराया वसूलने वाले टैक्सी चालक भी घायलों को मुफ्त अस्पताल पहुंचाने में पीछे नहीं रहे। पर हादसे के बाद अफवाहों के दौर भी चले।

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