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झारखंड में नरगा फेल

ेंद्र की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय ग्रामीण रोगार गारंटी योजना (नरगा) झारखंड में फेल हो गयी है। यहां के अधिकारियों के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। नरगा के करोड़ों रुपये अधिकारियों की झोली में चले गये। गरीबों को इसका फायदा नहीं मिल सका। कमीशनखोरी इस योजना में हावी हो गयी है। ऐसा मानना है सुरक्षा एजेंसियों का। विशेष शाखा और आइबी की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि की गयी है।ड्ढr केंद्र प्रायोजित इस योजना पर आइबी की रिपोर्ट को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है। जल्द ही केंद्र की एक टीम पूर मामले की छानबीन के लिए झारखंड पहुंच रही है। नरगा में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज बुलंद करनेवाले ललित मेहता की हत्या झारखंड में हुई थी।ड्ढr रिपोर्ट में कहा गया है कि जिला के उपायुक्त नरगा की कुल राशि का तीन प्रतिशत कमीशन लेते हैं। डीडीसी दो प्रतिशत, बीडीओ सात प्रतिशत, अभियंता तीन प्रतिशत और ठेकेदार को बचता है 20 से 25 प्रतिशत। रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि झारखंड ही इकलौता राज्य है, जहां फर्जी जॉब कार्ड के जरिये पैसे की निकासी होती है। साथ ही पहले से तैयार योजना को पूर्ण भी दिखाया जाता है। इस बाबत खुफिया विभाग ने राज्य सरकार को अलग से रिपोर्ट दी है। नरगा के तहत कई योजनाएं तो कागज पर ही पूरी कर, पैसे की निकासी कर ली गयी है।

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