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सुनवाई एक बार फिर टली

पूर्व मंत्रियों की आय से अधिक संपत्ति की जांच और हेलीकॉप्टर दुरुपयोग की जांच के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई एक बार फिर टल गयी है। दोनों मामले 24 अप्रैल को सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस की अध्यक्षतावाली खंडपीठ में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थे, लेकिन चीफ जस्टिस के नहीं रहने के कारण इस बेंच के सभी मामले जस्टिस एमवाइ इकबाल और जस्टिस डीके सिन्हा की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिये गये। पूर्व मंत्रियों की आय से अधिक संपत्ति के मामला जब सुनवाई के लिए कॉल किया गया, तो कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की अध्यक्षतावाली बेंच में पहले हो चुकी है।ड्ढr इस कारण दूसर बेंच में इसकी सुनवाई करना उचित नहीं होगा। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई स्थगित कर दी, जबकि हेलीकॉप्टर दुरुपयोग के लिए दायर बिंदू भूषण दुबे की जनहित याचिका समयाभाव के कारण टेक-अप ही नहीं हो सकी।ड्ढr स्वास्तिक कोक को नोटिस का निर्देशड्ढr झारखंड हाइकोर्ट ने किसानों को स्मार्ट कार्ड बनाने के मामले में स्वास्तिक कोक को नोटिस जारी किया है। नृपेंद्र कुमार परिमल की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस एमवाइ इकबाल और जस्टिस डीके सिन्हा की कोर्ट ने यह निर्देश दिया। याचिका में कहा गया है कि राज्य के दस जिलों के ढाई लाख किसानों को स्मार्ट कार्ड बनाने और मिट्टी की जांच के लिए सरकार ने टेंडर निकाला था। इसमें पांच कंपनियों ने हिस्सा लिया। एक कंपनी स्वास्तिक कोक भी है। प्रार्थी का कहना है कि टेंडर की शर्त थी कि हिस्सा लेनेवाली कंपनियों को इस क्षेत्र में काम का अनुभव रखना अनिवार्य है। स्वास्तिक कोक के पास इस तरह के काम का अनुभव नहीं है। एल वन नहीं होने के बावजूद यह कार्यादेश स्वास्तिक को दे दिया गया, जबकि तकनीकी समिति ने भी स्वास्तिक को काम नहीं देने की अनुशंसा की थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने स्वास्तिक कोक को नोटिस जारी किया।ड्ढr सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देशड्ढr झारखंड हाइकोर्ट ने आयुष के चेयरमैन डॉ अमरश्वर प्रसाद को निलंबित करने के मामले में सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। डॉ अमरश्वर ने अपने निलंबन को हाइकोर्ट में चुनौती दी है। इसमें कहा गया है कि सरकार ने आयुष चिकित्सकों की नियुक्ित के मामले में उन्हें निलंबित किया है, जबकि नियुक्ित करने का अधिकार उनके पास नहीं है। नियुक्ित करने का काम सरकार का है। नियुक्ित पर अंतिम निर्णय सरकार को लेना होता है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। प्रार्थी की ओर से वकील सुजीत नारायण प्रसाद ने बहस की।

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