अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

तो क्या मलेरिया के गिनती के दिन बचे हैं!

विश्व मलेरिया दिवस की पूर्व संध्या पर जारी रिपोर्ट में यूनीसेफ ने कहा है कि पिछले चार सालों के दौरान मलेरिया की रोकथाम के उपाय काफी हद तक सफल रहे हैं लेकिन अभी काफी कुछ किए जाने की जरूरत है। क्योंकि मलेरिया से अभी भी दुनिया में सालाना 10 लाख लोगों की मौत होती है जिनमें ज्यादातर बच्चे होते हैं। इतना ही नहीं मलेरिया पांच करोड़ गर्भवती महिलाओं को भी प्रभावित करता है, इससे उनमें रक्त की कमी, बच्चे का कमजोर पैदा होना, यहां तक कि कभी-कभी प्रसव के बाद मलेरियाग्रस्त महिला की मौत भी हो जाती है। यूनीसेफ ने मलेरिया प्रभावित देशों से कहा है कि अगले 600 सौ दिनों के भीतर मलेरिया पर काबू पाने का लक्ष्य हासिल करने के उपायों को अंजाम दें। इसलिए यूनीसेफ का इस बार का स्लोगन है, ‘मलेरिया के दिन अब गिने-चुने।’ यहां बता दें कि भारत में हालांकि मलेरिया से मौतें कम हुई हैं लेकिन अभी भी सालाना 12 लाख लोग मलेरिया की चपेट में आते हैं। यूनीसेफ के कार्यकारी निदेशक एन एम. वेनमैन ने कहा कि हाल के वर्षो के प्रयासों से अब काफी हद तक हम इस स्थिति में आ रहे हैं कि मलेरिया से मौतें कम से कम हों। मलेरिया से सर्वाधिक प्रभावित अफ्रीकी देश भी खतर वाली 40 फीसदी आबादी में रोकथाम के उपाय करने में सफल हो चुके हैं। इसमें यूनीसेफ द्वारा प्रदत्त मच्छर रोधी दवा लगी मच्छरदानियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। यूनीसेफ ने 2004 में तीन करोड़ ऐसी मच्छरदानिया वितरित की थी लेकिन 2008 में 10 करोड़ मच्छरदानिया बांटी गई हैं। मलेरिया की रोकथाम के लिए यूनीसेफ ने 31 दिसंबर 2010 तक की डेडलाइन निर्धारित की है। सभी मलेरिया प्रभावित देशों से कहा गया है कि अब इसमें सिर्फ 600 दिन बचे हैं, इसलिए वे मच्छरों का प्रजनन रोकने,मच्छरों की रोकथाम, मलेरिया के उपचार आदि का सौ फीसदी कवरज प्रदान करं। यूनीसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट में दो और बातें कही गई है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: तो क्या मलेरिया के गिनती के दिन बचे हैं!