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सब बिजी हैं

उनक मास्टरमाइंड पकड़ रही है। मीडिया का उनक संपर्का की, उनक काम करन क तौर- तरीकां की स्टारियां द रही हैं। व गुजरात सरकार क टच मं हैं, व महाराष्ट्र सरकार क टच मं हैं। व सबक टच मं हैं। जनता और घबरा गयी-अच्छा गृहमंत्रीजी कहां हैं? सरकार हंसी-दखा व बहुत बिजी हैं। और हां, यह बहुत गलत बात है,जा बार-बार गृहमंत्री क बार मं पूछा जाता है। एस किसी क पीछ नहीं पड़ना चाहिए। सबका पता है व अपन वार्डराब क सामन खड़ हांग। साच रह हांग कि कौन सा सूट पहनूं। यह स्लटी सुबह पहना था, य सफद दापहर मं, ब्लूवाला ता कल शाम का पहना ही था। बड़ा मुश्किल है चूज करना। जनता न कहा-नहीं जी, हम उनक सजन-धजन की बात नहीं कर रह। सरकार नाराज हा गई। बाली-ता किसकी बात कर रह हा। चिात व नहीं, गाली-गलौच व नहीं करत। आलाचना किसी की व नहीं करत। सुदर्शन और सुसंस्कृत आदमी हैं। जनता की कुछ समझ मं नहीं आ रहा था-अच्छा ता फिर प्रधानमंत्री कहां हैं? सरकार न कहा-व बहुत बिजी हैं। अमेरिका मं हैं। बुश स मिल रह हैं। दानां अहा रूपम, अहा ध्वनि का पाठ कर रह हैं। डील फाइनल कर रह हैं। इस डील क लिए उन्हांन क्या-क्या नहीं किया। महंगाई का नजरअंदाज किया। अमरसिंह का गल लगाया। घाड़ामंडी क उतार-चढ़ाव तक पर नजर रखी। शिबू सारन का मुख्यमंत्री बनवाया। जनता न पूछा- अच्छा क्या डील हा गई? हा जाएगी- सरकार न कहा-डील ता हानी ही है। दख नहीं रह हा कैस बुश साहब लग हुए हैं, कांडीजी लगी हुई हैं। प्रधानमंत्री का बड़-बड़ काम करन हात हैं। व सिर्फ बम पर निगाह रखन क लिए नहीं बैठ। जनता और घबरा गई। किसे अपना दर्द बताए। किसस गुहार कर। सब बिजी। टी वी चैनलवालां न कहा-बम फूटा है न, चला हम चलत हैं। हम सातां दिन और चौबीसां घंट दिखाएंग। नमक-मिर्च क साथ। चटपट ढ़ंग स। नए-नए एंगल स। चिंता क्यां करत हा। रुकंग ता बस ब्रक क लिए।ं

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