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करार की मंजूरी से अमेरिकी कंपनियों की बांछें खिलीं

भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के सीनेट में पास होने के बाद अमेरिकी कंपनियों को उम्मीद है कि इससे वर्ष 2030 तक भारत में 150 अरब डॉलर के नए निवेश की संभावनाएं पैदा हो सकती है। यूएस चैंबर्स ऑफ कामर्स ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह अमेरिकी कंपनियों के लिए शानदार मौका है। अगर अमेरिकी कंपनियों को संयंत्र निर्माण के ठेके मिले, तो अमेरिका में ढाई लाख नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं। संगठन का कहना है कि दोनो देशों के बीच परमाणु व्यापार में नजदीकियां आगे बढ़ी, तो इसका सीधा असर अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा और दोनो देशों के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध स्थापित होंगे। संगठन का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक भारत को 30 से 60 हजार मेगावाट बिजली की जरूरत होगी, जिसे परमाणु बिजली से पैदा किया जाएगा। ऐसे में परमाणु संयंत्रों के विकास में भारी भरकम निवेश किया जाएगा। इससे पहले संगठन ने अमेरिकी सांसदों को पत्र लिखकर कहा था कि वे परमाणु करार को जल्द से जल्द मंजूरी दें, क्योंकि फ्रांस और रूस की कंपनियां पहले ही भारत के साथ संयंत्रों के विकास के लिए बातचीत करने में लगी हुई है। ऐसे में अमेरिकी कंपनियों के पिछड़ने की आशंका बढ़ती जा रही है। यूएस इंडिया बिजनेस कांउसिल ने भी एक बयान जारी कर समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे दोनों देशों की कंपनियों को फायदा होगा और काफी लोगों को रोजगार मिलेगा।

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