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19 जिलों में उपलब्धि पचास प्रतिशत से कम

राष्ट्रीय रोगार गारंटी योजना(नरगा) में मस्टर रॉल की अहम भूमिका होती है। मस्टर रॉल के माध्यम से ही मजदूरी का भुगतान होता है। राज्य में नरगा लागू होने के समय से ही मस्टर रॉल में हेराफेरी की शिकायत मिलती रही है। केंद्र के निर्देश के अनुसार इस गड़बड़ी को रोकने के लिए मस्टर रॉल को शत प्रतिशत एमआइएस यानी कम्प्यूटर में फीड करने का निर्देश है। लेकिन झारखंड के अधिकांश जिलों में यह काम काफी धीमी गति से हो रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि सारी सुविधाओं के बावजूद जिले के डीसी-डीडीसी इस काम में अपनी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जबकि डीडीसी नरगा के जिला प्रोगा्रम पदाधिकारी हैं। अधिकांश जिलों में यह उपलब्धि पचास प्रतिशत से भी कम है। मस्टर रॉल को कम्प्यूटराइड कराने में जिलों की उपलब्धि इस प्रकार है:- गढ़वा में 10 फीसदी, चतरा 13, लोतहार15, चाईबासा 18, हाारीबाग 18, पूर्वी सिंहभूम 24, कोडरमा 27, रांची 2सिमडेगा 30, सरायकेला 40, लोहरदगा 42, बोकरो 44, पलामू 45, गोड्डा 45, गुमला एवं देवघर 50 प्रतिशत है। सिर्फ पाकुड़ में दुमका 71, धनबाद 6ाामताड़ा 5प्रतिशत है। नरगा आयुक्त सत्येन्द्र सिंह ने स्थिति में सुधार लाने के लिए 15, 16 और 17 अक्तूबर को प्रमंडलवार समीक्षा बैठक बुलायी है।

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