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शिविरों में खीर-पूरी के साथ मनी ईद

अपने गम भूल गुरुवार को एक-दूसर से गले-मिले मुस्लिम भाई। बाढ़ राहत शिविर में रह रहे बाढ़पीड़ितों ने तमाम दिक्कतों के बाद भी खुशी-खुशी ईद मनाया। प्रशासन भी उनकी हर संभव सहायता के लिए तत्पर दिखा। हालांकि उनके चेहरों पर कहीं न कहीं घर से बिछड़ने की पीड़ा भी साफ दिख रही थी। शिविर में खीर-पूरी के साथ ही नये कपड़े भी बांटे गये। सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, पूर्णिया, अररिया के बाढ़ राहत शिविरों के साथ-साथ अगल-बगल स्थित मसिदों में नमाज अदा की गई। बाढ़पीड़ितों ने कहा कि कोसी की पीड़ा से मुक्ित दिलाने के लिए अल्लाह से दुआ मांगी है।ड्ढr सहरसा के पटेल मैदान स्थित मेगा शिविर में शरण लिए चकला सुखासन का मो. जमाल बताता है कि बुधवार को ही उन्हें लुंगी व गंजी, औरतों को साड़ी-ब्लाउा और छोटे-छोटे बच्चों को नये कपड़े दिये गये। टेंट में रह रही टेंगराहा, कुमारखंड की हसमूल खातून बताती है, पति व बच्चे गाड़ी से आरण-भेलवा स्थित ईदगाह में नमाज पढ़ने गये हैं। शिविर में भी त्यौहार जसा माहौल दिखा।ड्ढr ड्ढr सुपौल में जिला प्रशासन द्वारा विशेष भोजन की व्यवस्था की गयी। साथ ही नये वस्त्र भी दिये गये। मधेपुरा शहर स्थिति बाढ़ राहत कैंप के अलावा सिंहेश्वर मेगा कैंप, धलाढ़ मेगा शिविर में रह रहे मुस्लिम परिवारों के बीच सरकार की ओर से नये कपड़े,टोपी और इत्र की व्यवस्था की गयी। जबकि दशहरा के मौके पर भी कैंप में सभी पीड़ितों को नये वस्त्र उपलब्ध कराये गये। अररिया के सरकारी राहत शिविरों में बाढ़पीड़ितों ने पूड़ी, सब्जी एवं सेवई का आनंद उठाया। शिविरों के साथ-साथ मसिदों में नमाज भी अदा की। पूर्णिया के मरंगा व चांदपुर भंगहा के राहत शिविर में भी प्रशासन ने भोजन का विशेष इंतजाम किया था। हालांकि राहत शिविर में रह रहे बाढ़पीड़ितों को इस बात का मलाल था कि ईद के मौके पर नये कपड़े नहीं पहन सके।

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  • Web Title: शिविरों में खीर-पूरी के साथ मनी ईद