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भीड़ में जाएं तो पर्स बचाकर

पर्व-त्योहार का मौसम है। अगर शॉपिंग या किसी अन्य काम से जा रहे हों तो सावधान। भीड़ में एक से बढ़ कर एक शातिर अपराधी छिपे हैं। कई ऐसे तरीके से खुराफाती उचक्के निशाना बना सकते हैं जिसमें आपको पता भी नहीं चलेगा और मोबाइल, पर्स या अन्य कीमती सामान गायब हो जायेगा। दुर्गा पूजा की दस्तक के साथ ही राजधानी के विभिन्न इलाकों में ऐसी घटनाओं का सिलसिला शुरू हो गया है।ड्ढr ड्ढr अपराधियों के निशाने पर पैदल राहगीर से लेकर कार सवार लोग तक हैं। बुधवार को बोरिंग रोड निवासी महिला सुमन देवी बच्चों के साथ खरीदारी करने के लिए बाकरगंज पहुंचीं। हालांकि उनके होश तब उड़ गये जब उचक्कों ने उनकी पर्स गायब कर दी जिसमें ढाई हजार नकद, एटीएम व अन्य महत्वपूर्ण कागजात थे। असामाजिक तत्वों ने कैसे पर्स चुराये, इसका पता भी नहीं चला। बीते मंगलवार को पूजा सामान की खरीदारी के लिए डाकबंगला स्थित एसबीआई के एटीएम से 4 हजार नकद निकालने के बाद शशिशेखर उर्फ साधुजी (पुलिस कॉलोनी, अनीसाबाद) जब होटल में खाना खाने गये तो पॉकेट से नकद गायब देख कर दंग रह गये। उन्हें भी पॉकेटमारी का अहसास नहीं हो पाया। आलम यह है कि कुछ इलाकों में उचक्के चोरी के साथ सीनाजोरी भी कर रहे हैं। ऐसा ही वाकया बीते मंगलवार को राजेन्द्रनगर ओवरब्रिज के समीप हुआ। जाम में फंसी कार में बैठे जल संसाधन विभाग के उप निदेशक मृत्युंजय सिंह से पहले अपराधियों ने बेवजह बकझक व गालीगलौज शुरू कर दी।ड्ढr ड्ढr जब वे कार से बाहर निकले तो उचक्कों ने घेर कर उनके साथ सरआम हुज्जत शुरू कर दी।ड्ढr इसी दौरान एक लफंगा उनकी पॉकेट से मोबाइल खींच कर चंपत हो गया। बाद में इस मामले की प्राथमिकी कंकड़बाग थाने में दर्ज कराई गई। बहरहाल ये घटनाएं तो बानगी भर हैं। दुर्गा पूजा करीब एक सप्ताह और चलेगा। ऐसी स्थिति में उचक्के कब, कहां और कैसे उत्पात मचाएंगे, कहना मुश्किल है।

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