DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आखिरकार सिंगुर से पल्ला झाड़ा टाटा ने

टाटा मोटर्स के चेयरमैन रतन टाटा ने शुक्रवार की रात सिंगुर से नैनो कार परियोजना अन्यत्र ले जाने का एलान किया। मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के साथ डेढ़ घंटे तक बैठक करने के बाद टाटा ने यह एलान किया। उन्होंने कहा कि दुर्गापूजा के ठीक पहले यह घोषणा करने का उन्हें खेद है पर सिंगुर से नैनो परियोजना हटाने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं था। उन्होंने कहा कि यह अभी तय नहीं किया गया है कि सिंगुर संयंत्र कहां ले जाया जाएगा पर तीन-चार राज्यों से प्रस्ताव आया है। टाटा ने कहा कि आंदोलन ही एक मात्र कारण है जिसके कारण टाटा मोटर्स को सिंगुर से नैनो संयंत्र हटाने का फैसला करना पड़ा। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनके कारोबारी प्रतिद्वंद्वियों ने आंदोलनकारियों की मदद की या नहीं पर यह ताज्जुब है कि सिंगुर आंदोलनकारियों को आंदोलन के लिए धन कहां से मिला? रतन टाटा ने कहा कि सिंगुर में गत दो वर्षो के दौरान संयंत्र व सहकारी इकाइयों के कर्मचारियों को धमकाया जा रहा था, हमले हो रहे थे, उन कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए ही संयंत्र यहां से हटाया जा रहा है। परियोजना हटाने से काफी आर्थिक नुकसान हुआ है पर निर्णय लेना जरूरी था। हालांकि मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने और उनकी सरकार ने संयंत्र के लिए पूरी मदद की। उन्होंने सुरक्षा देने की बात भी कही थी, पर वैसी सुरक्षा लेकर संयंत्र नहीं चलाया जाता। टाटा ने कहा कि टाटा समूह भविष्य में बंगाल में निवेश करगा। नैनो परियोजना के लिए अपनी जमीन देने को अनिच्छुक किसानों की संख्या दो हाार से ज्यादा है। ये किसान अभी भी अपनी जमीन वापस पाने के लिए तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी की अगुवाई में लड़ रहे हैं।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: आखिरकार सिंगुर से पल्ला झाड़ा टाटा ने