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हैक्सविक्स से होगी मूत्राशय कैंसर की जांच

मूत्राशय के कैंसर की पहचान के लिए अब ‘आला’ से भी अधिक कारगर तकनीक ‘हैक्सविक्स’ आ गई है जिसकी चमकीली नीली निगाहों से कैंसरग्रस्त छोटे से छोटा तंत्र भी नही बच पता। ‘आला’ यानी ‘एल्फा लिन्तेलैनिक एसिड’ (एएलए) तकनीक मूत्राशय के कैंसर की जांच के लिए भारत समेत कई देशों में अब भी इस्तेमाल की जाती है। जबकि जर्मनी समेत यूरोप के करीब 27 देशों अब अत्याधुनिक हेक्सविक्स यानी हेक्सामिनोलेवुलिनेट तकनीक इस्तेमाल की जा रही है। इस अत्याधुनिक तकनीक के बारे में जानकारी देते हुए जीई हेल्थकेयर ने शुक्रवार को यहां नवे एशियाई यूरोलांजी सम्मेलन के दौरान इसे भारत में उतारने की घोषणा की। इस अवसर पर जर्मनी के यूरोलांजी के जाने माने प्रोफेसर कार्लडी सेवर्ट ने बताया कि इस तकनीक में चमकदार नीली लाइट की मदद से कैंसर ग्रस्त कोशिकाआें के अलावा वे छोटी-छोटी कोशिकाएं भी दिख जाती है जो जरा सी भी संक्रमित होती है। उन्होंने बताया कि ‘आला’ से केवल कैंसरग्रस्त भाग ही दिख पाता है इसलिए डाक्टर केवल उसी भाग को आपरेशन कर निकाल देते हैं। अन्य छोटी-छोटी प्रभावित कोशिकाएं भी कुछ समय बाद विकराल रुप ले लेती है और रोगी को फिर आपरेशन कराना पड़ता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के यूरोलाजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर नर्मदा प्रसाद गुप्ता ने बताया कि निश्चित रुप से यह तकनीक काफी कारगर साबित हो सकती है। हालांकि भारत में अभी यह अत्याधुनिक तकनीक आने में कम से कम एक वर्ष और लग सकता है। डाक्टर गुप्ता ने बताया कि ड्रग कंट्रोलर आफ इंडिया (डीसीआई) की स्वीकृति के बाद ही इसके ट्रायल भारत में किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि डीसीआई की स्वीकृति के तुरंत बाद देश भर के 10-15 केन्द्रों में ट्रायल शुरु कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि दरअसल आला तकनीक से प्रभावित अंग सफेद रौशनी फेंकी जाती है जबकि इस अत्याधुनिक ‘हैक्सविक्स’ से जांच के दौरान लोरोसेट ब्लू लाइट फेंकी जाती है। जिससे प्रभावित भाग के अलावा मामूली रुप से प्रभावित भाग भी साफ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि इस नई तकनीक की मदद से डाक्टर एक बार में ही सारा प्रभावित हिस्सा निकाल देगा जिससे बार-बार आपरेशन की संभावना भी कम हो जाएगी।

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  • Web Title: हैक्सविक्स से होगी मूत्राशय कैंसर की जांच