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एडमिरल मेहता ने साधा नौकरशाहों पर निशाना

नौसेनाध्यक्ष एडमिरल सुरीश मेहता ने फिर एक बार नौकरशाहों पर निशाना साधते हुए कहा है कि सेना में नाराजगी पैसे को लेकर नहीं बल्कि सेना की इज्जत तथा समकक्ष नौकरशाहों और सेना अधिकारियों के बीच कमान व कंट्रोल संबंधों में भेदभाव को लेकर थी। गौरतलब है कि छठे वेतन आयोग की सिफारिशों और बाद में अधिकार प्राप्त सचिवों के समूह की सिफारिशों से सेना में पे बैंड, रैंक, सैनिकों के वेतन और लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारियों को उच्च प्रशासनिक ग्रुप प्लस का दर्जा न देने पर भारी नाराजगी रही है। एडमिरल मेहता ने साफ किया कि सरकार के राजनीतिक पक्ष से सेना को कोई शिकायत नहीं है। शिकायत है तो नौकरशाहों के रवैये से। यही कारण है कि बरती गई अनियमितताओं को दूर करने के लिए सैन्य प्रमुखों ने सरकार से कैबिनेट के हस्तक्षेप की मांग की थी जिसके परिणामस्वरूप विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई जिसमें रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी और वित्त मंत्री पी.चिदंबरम भी शामिल हैं। यह समिति एक महीने में सेना की मांगों पर अपना फैसला सुनाएगी। यहां प्रादेशिक सेना दिवस परड के मौके पर संवाददाताओं से बातचीत में नौसेनाध्यक्ष ने कहा कि मामला पैसों का नहीं, बल्कि पद और समानता का था। पैसों के मामले को मीडिया ने कुछ ज्यादा ही उछाल दिया। सूत्रों के मुताबिक सेना प्रमुखों द्वारा गत 26 सितंबर को वेतन का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी न करने के फैसले पर रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने सरकार की नाराजगी से सेना प्रमुखों को अवगत कराया है लेकिन इस मामले को सरकार ज्यादा तूल देने के पक्ष में नहीं है। यूं भी तीनों सेना प्रमुख दोहरा चुके हैं कि उनकी सरकार से कोई नाराजगी नहीं है और न ही किसी बात पर मतभेद है।

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