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वीसीआई ने वेटनरी कॉलेज को दिसंबर तक का समय दिया

शुक्र मनाइये कि वेटनरी कौंसिल ऑफ इन्डिया (वीसीआई) की भौहें तनीं और कॉलेज प्रशासन के साथ ही सरकार भी जाग गई। नहीं तो सूबे के एकमात्र वेटनरी कॉलेज के छात्र और वैज्ञानिक कुत्ते-बिल्लियों पर ही शोध करते रह जाते। अब इन्हें गाय-गोरू की सेवा का मौका भी मिलेगा। बिहार वेटनरी कॉलेज की स्थिति सुधारने के लिए वीसीआई ने दिसंबर 2008 तक का समय दिया है। सुधार की पहल शुरू हुई है और क्लीनिकल काम्प्लेक्स के लिए पुराना एलआरएस भवन कॉलेज को दे दिया गया।ड्ढr ड्ढr अब दानापुर के पशु अस्पताल को भी इस कॉलेज से जोड़ने की कवायद शुरू है। कॉलेज ने प्रस्ताव दिया है और विभाग की सहमति भी मिल गई है लेकिन फाइल में आदेश अभी नहीं हुआ है। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के प्रधान सचिव भानु प्रताप शर्मा ने बताया कि प्रस्ताव पर सहानुभुतिपूर्वक विचार चल रहा है। बिहार वेटनरी कॉलेज के प्राचार्य सियाराम सिंह ने बताया कि कॉलेज परिसर कारपोरशन एरिया में होने के कारण यहां इलाज के लिए बड़े जानवर नहीं लाये जाते हैं।ड्ढr ड्ढr छोटे जानवरों की कोई कमी नहीं होती लेकिन छात्रों को प्रैक्िटकल जानकारी के लिए बड़े जानवरों का इलाज करना भी जरूरी होता है। वैज्ञानिकों को शोध में भी परशानी होती है। इसीलिए दानापुर के पशु अस्पताल को इस कॉलेज से जोड़ने का प्रस्ताव विभाग के पास भेजा गया है। उन्होंने कहा कि वीसीआई ने मूलत: क्लीनिकल काम्प्लेक्स को लेकर ही आपत्ति जाताई है। पुराने एलआरएस भवन में इसकी व्यवस्था की जा रही है। वीसीआई की टीम 31 दिसम्बर को फिर कॉलेज की स्थिति की समीक्षा करेगी।

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