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आधा दर्जन जगहों पर यूनिक मूर्तियां दिखेंगी

दुर्गापूजा में इस बार लगभग आधा दर्जन जगहों पर दुर्गामाता की मूर्ति से अलग तरह की मूर्ति बिठायी जा रही है। इन्हें पारंपरिक मूर्तियों से अलग स्टाइल से बनाया जा रहा है। इसमें मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इन मूर्तियों को आम जनजीवन में रोजाना इस्तेमाल करने वाली चीजों से बनायी जा रही है। गाजर का हलवा, सेवई, आइसक्रीम स्टिक, मूंगा, फैंसी स्टोन व माचिस की तिल्ली से भारत माता की मूर्तियां बन रही हैं। चंदन, जितेद्र, अशोक कुमार व राधेश्याम इन मूर्íर्तयों को लगभग अंतिम रूप दे चुके हैं।ड्ढr ड्ढr अबूलास लेन में फैंसी स्टोन की मूर्ति स्थापित होगी। इस अनोखी मूर्ति को अंतिमरूप देने में अशोक कुमार जुटे थे। वे बताते हैं कि लगभग दस किलो फैंसी स्टोन का इस्तेमाल किया गया है। राधेश्याम से इस कला को सीखने वाले अशोक इसके पहले पांच पैसे की प्रतिमा, पटुआ, हुमाद, शीशे की व पानी मोती की प्रतिमा बना चुके हैं। नाला रोड में पेट्रोल पंप के पास गाजर के हलवे की मूर्ति ,अमरुदी गली में मूंगा की मूर्ति , खजांची रोड में आइसक्रीम स्टिक, मुसल्लहपुर में सेवई की अनोखी मूर्ति स्थापित होगी। इन मूर्तियों को साकार कर रहे दो भाई चंदन व जितेद्र। उन्होंने बताया कि लगभग 15 किलो गाजर का हलवा से मूर्ति बनायी जा रही है। इसे बनाने में काफी सर्तकता बरती जा रही है। निर्माणस्थल पर मूर्ति बनाने के बाद दवा का छिड॥काव किया जाता है ताकि चीटियां न बैठें। साथ ही मूर्ति स्थापित होने वाली जगह पर कूलर व बगल में पानी का लगातार इंतजाम रहेगा। वे पहले तुलसी माला, राजमा, साबूदाना, स्ट्रॉ, अगरबत्ती, गरममसाला की मूर्तियां बना चुके हैं। बड़े भाई संजीव को मिट्टी की मूर्ति बनाते देख उन्होंने यह कला सीखी। भंवर पोखर में दियासलाई की कांटी की मूर्ति राधेश्याम बना रहे हैं। मूर्ति में लगभग 150 डिब्बा माचिस की डिब्बी इस्तेमाल की गयी है।

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