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फरियाद सुनने वाला फोरम ही अपंग

उपभोक्ताओं की समस्याओं को सुनने वाला फोरम खुद अपंग बना हुआ है। पटना जिला उपभोक्ता फोरम (न्यायालय) में छह माह से सुनवाई बंद है। हर माह 40 से 50 मामले यहां दर्ज हो रहे हैं, पर कार्यवाही ठप है। नियमानुसार 0 दिनों में केस का फैसला देना होता है। फोरम के पंगू होने का खामियाजा उपभोक्ताओं को भोगना पड़ रहा है। शिकायत दर्ज करने आए लोग नाउम्मदी के साथ लौट रहे हैं और इन्हें चूना लगाने वालों के हौसले बुलंद हैं। इस बाबत उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष दामोदर प्रसाद ने बताया कि हर फैसले में उनके अलावा कम-से-कम एक सदस्य का हस्ताक्षर अनिवार्य है। मार्च, 2008 के बाद से फोरम के दोनों सदस्यों के पद खाली हैं।ड्ढr ड्ढr यही वजह है कि सुनवाई ठप है। समस्याओंे को लेकर फोरम में उपभोक्ता आ रहे हैं और उनकी फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। महिला सदस्य के चयन लिए फोरम की ओर से तीन का नाम सितंबर, 2007 में सरकार के पास भेजा गया था लेकिन अभी तक इस संबंध में सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। इसी प्रकार पुरुष सदस्य के लिए तीन नामों की सूची भी पिछले माह भेज दी गई। सदस्य के नाम का अंतिम फैसला सरकार को करनी होती है। जिला फोरम में अध्यक्ष के अलावा दो सदस्य होते हैं, जिनका कार्यकाल पांच वर्षो का होता है। प्रसाद ने कहा कि फिलहाल पूर्व में हो चुके फैसले से संबंधित दावे की रकम को शिकायतकर्ताओं को सुपुर्द किया जा रहा है। सुनवाई बंद होने के बाद से अब तक करीब दस लाख रुपये उपभोक्ताओं को दिये गये हैं।ं

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